संजीवनी टुडे

एसआरएस ने एसबीआई को लगाया 628 करोड़ का चूना

संजीवनी टुडे 23-02-2019 22:06:20


फरीदाबाद। फरीदाबाद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने एसआरएस ग्रुप के डिफॉल्टर होने के 33 माह बाद आखिरकार मान लिया कि एसआरएस ने बैंक के धोखाधड़ी की है। एसआरएस लिमिटेड ने एसबीआई से ऋण लेकर चुकाया नहीं और बैंक के 628 हड़प कर गया। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा एसआरएस लिमिटेड नियुक्त इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (दिवालिया विभेदन पेशवर) ने इसकी जांच शुरू की तो जनवरी 2019 में बैंक से धोखे की बात मानी। हालांकि अभी भी बैंक ने पुलिस में इसकी शिकायत नहीं की है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने एसआरएस लिमिटेड की जांच के लिए इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल नियुक्त कर रखा है।

इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल की जांच में सामने आया कि एसआरएस लिमिटेड को विभिन्न बैंकों ने ऋण के रूप में लिए थे। एसआरएस ने ऋण नहीं चुकाया और बैंकों का करोड़ों रुपये हड़प लिए। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 628.31 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया 223.79 करोड़, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 125.24 करोड़, ओरियेंटल बैंक ऑफ कामर्स 68.78 करोड़, सिंडिकेट बैंक 14.13 करोड़, एक्सि बैंक के 54.90 करोड़ रुपये बकाया हैं। गौरतलब है कि एसआरएस लिमिटेड ने अप्रैल 2016 से ऋण की किश्त चुकाना बंद कर दिया था। इसके बावजूद बैंक ने एसआरएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अब जब इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल ने जांच शुरू की तो पिछले दिनों क्रेडिटर्स कमेटी की मासिक बैठक में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कमेटी को बताया कि उन्होंने एसआरएस द्वारा लिए गए ऋण को नहीं चुकाने पर उसे धोखाधड़ी मान लिया है।

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मगर यहां सवाल यह भी उठ रहा है कि बैंकों ने अभी तक एसआरएस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों को शिकायत क्यों नहीं की है। इस बारे में बैंक की ओर से क्रेडिटर्स कमेटी की बैठक में शामिल हुए बैंक के सहायक महाप्रबंधक अनिल कनौतरा से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में कुछ भी बताने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

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एसआरएस लिमिटेड के खातों की जांच में जुटी ग्रांट थोर्टन कंपनी ने एसआरएस में एक बड़े घोटाले की बात कही है। ग्रांट थोर्टन ने जांच के बाद 14 फरवरी को अपनी रिपोर्ट इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल को सौंप दी है। उस रिपोर्ट के आधार पर क्रेडिटर्स कमेटी को बताया गया कि एसआरएस ने ज्वैलरी के कारोबार में जो 1290 करोड़ रुपये का लेनदेन दिखाया है, वह फर्जी है। कंपनी ने एसआरएस के देनदारों से संपर्क करने का प्रयास किया, मगर पता चला कि इनमें से अधिकांश कंपनियां या तो हैं ही नहीं या उनका कोई संपर्क नहीं है।

 

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