संजीवनी टुडे

विशेष: 2021 फतह की रणनीति का हिस्सा है कटमनी के खिलाफ ममता का अभियान

संजीवनी टुडे 24-06-2019 14:34:15

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की एवज में सत्तारूढ़ तृणमूल नेताओं द्वारा आम लोगों से वसूली जाने वाली रिश्वत या कटमनी को लेकर पूरे राज्य में चर्चा है।


कोलकाता। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की एवज में सत्तारूढ़ तृणमूल नेताओं द्वारा  आम लोगों से वसूली जाने वाली रिश्वत  या 'कटमनी' को लेकर पूरे राज्य में चर्चा है।  स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रंगदारी के तौर पर की जाने वाली  वसूली को   कटमनी नाम दिया है । इस मुद्दे  पर राज्य भर में हंगामा मचा हुआ है। 

दरअसल पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य भर के सभी नगर पालिकाओं के पार्षदों के साथ एक बैठक की थी और उसमें मीडिया के कैमरे के सामने मुख्यमंत्री ने पार्षदों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था, "मुझे पता चला है आप लोगों ने राज्य की तमाम सरकारी परियोजनाओं के लिए आम लोगों से "कटमनी" लिया है। उसे बिना देरी किए लौटाइए, नहीं तो पार्टी कार्रवाई करेगी।" ममता बनर्जी ने मीडिया के कैमरे के सामने अपनी ही पार्टी के नेताओं को कटमनी  को  लेकर चेतावनी दी । इसके पीीछे की रणनीति पहले तो   तो लोगों की समझ में नहीं आई लेकिन धीरे धीरे स्पष्ट होने लगी  है। ममता के इस निर्देश के बाद राज्यभर में आम लोग सड़कों पर उतर आए हैं। 

सत्तारूढ़ पार्टी के सभी भ्रष्ट नेताओं, कार्यकर्ताओं  के खिलाफ लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने लगे हैं जिन्होंने उनसे कभी घूस लिया था। मीडिया की खबरों और राज्य भर में मचे हंगामे की रिपोर्टिंग सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय को हो रही है और जहां भी भ्रष्ट लोग हैं या तो वे पार्टी छोड़ रहे हैं या तृणमूल की ओर से उन्हें हटाया जा रहा है। कुल मिलाकर कहें तो इस कटमनी के खिलाफ अभियान के जरिए  सत्तारूढ़ तृणमूल को अस्थाई तौर पर भ्रष्टाचार से मुक्त करने की पहल ममता बनर्जी ने की  है। 

इसका सकारात्मक प्रभाव कितना होगा यह कहना मुश्किल है लेकिन फिलहाल इसका नुकसान भी हो रहा है। विपक्ष इसे लेकर मुख्यमंत्री पर सवाल उठाते हुए  कह रहा है कि आठ सालों तक ममता ने इन्हीं भ्रष्टाचारियों को पाला था। सवाल यह है कि आखिर आठ सालों तक सत्ता में रहने के बाद  ममता को अचानक कटमनी के खिलाफ अभियान छेड़ने का खयाल कैसे आया। सूत्रों की मानें तो इस पहल  के पीछे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की बड़ी भूमिका  सै।

गत छह जून को ही राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ सीएम ने सचिवालय में बैठक की थी और 10 जून को ग्रीवांस सेल की शुरुआत की गई थी। रिटायर्ड कर्नल दीप्तांशु राय चौधरी को इसका हेड बनाया गया है और राज्य के मुख्य सचिव मलय दे को पूरी कार्रवाई प्रक्रिया की जिम्मेवारी सौंपी गई है। 

मतलब एक तरफ मुख्यमंत्री ने भ्रष्ट अधिकारियों नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर और उस पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था पहले की । उसके बाद कटमनी शब्द का इस्तेमाल किया जिसके बाद पूरे राज्य में लोग भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। ममता बनर्जी रिश्वत लेने वाले  नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी कर रही हैं और उनकी जगह और साफ-सुथरी छवि वाले लोगों को भी पार्टी में जगह दी जा रही  है। 

सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर ने ही ममता को यह सलाह दी थी जिसके बाद इसे अमल में लाया गया। यह भी पता चला है कि प्रशांत किशोर की पूरी टीम राज्य भर में समीक्षा करने में जुट गई है। जीतने और हारने वाले सांसदों के साथ एक दौर की बैठक संपन्न कर ली गई है और घर -घर जाकर प्रशांत किशोर के पेशेवर रणनीतिकार लोगों के बीच मौजूदा रोष को समझ रहे हैं। यह 2021 के विधानसभा चुनाव की तैयारी है। 

उल्लेखनीय है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पश्चिम बंगाल में शानदार प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर को अपना राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया है। अपनी पार्टी में चिटफंड और नारद स्टिंग जैसे घोर भ्रष्टाचार वाले नेताओं को भी ममता ने पूर्व में अपने कैबिनेट में जगह दी थी। 

अब मुख्यमंत्री राज्य भर के छोटे स्तर के नेताओं को भी छोटे से छोटे भ्रष्टाचार के लिए हटाने लगी हैं तो माना जा रहा है कि इसके पीछे प्रशांत किशोर का ही दिमाग है। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी अपनी पार्टी की साफ-सुथरी छवि एक बार फिर बनाने में जुट गई हैं। अब देखने वाली बात होगी कि लोग इसे कितना स्वीकार करेंगे।

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