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अयोध्या में तीर्थयात्रियों के अनुकूल व्यवस्था बनाएगा श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट : चम्पत राय

संजीवनी टुडे 25-02-2020 18:52:55

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव एवं विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।


नई दिल्ली। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव एवं विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हम चाहते हैं कि अयोध्या जाने वाले श्रद्धालु यह प्रत्यक्ष अनुभव करें कि फैसले के बाद से अयोध्या में क्या-क्या परिवर्तन हुए हैं। तीर्थयात्रियों के अनुकूल व्यवस्था बनाने के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं। 

विहिप उपाध्यक्ष राय ने मंगलवार को 'हिन्दुस्थान समाचार' को बताया कि मंदिर निर्माण का कार्य पूरा होने तक रामलला को अस्थाई मंदिर में शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि आगामी नवरात्र में रामलला के दर्शन अस्थायी रूप से बनाए जाने वाले मंदिर में किये जा सकें। यह अस्थायी मंदिर ऐसा होगा जिसमें एक साथ कम से कम 25 श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकेंगे। मौजूद व्यवस्था में सिर्फ एक-दो श्रद्धालु ही दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि हम कोई भी नया कार्य रामनवमी से पहले शुरू नहीं करेंगे। कोई भी नया काम अप्रैल के तीसरे सप्ताह या अप्रैल बीतने के बाद ही शुरू करेंगे। 

ट्रस्ट के महासचिव राय ने कहा कि हम ऐसा काम करेंगे कि रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को ज्यादा पैदल न चलना पड़े। जितनी दूरी घटाई जा सकती है, हम घटाने का प्रयास करेंगे। सुरक्षा भी एक पहलू है। दूरी घटाने के लिए सुरक्षा खतरे में नहीं पड़नी चाहिए, हम इसका भी ध्यान रखेंगे। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र 29 फरवरी को अयोध्या में रहेंगे। आर्किटेक्ट को भी बुलाया गया है। अयोध्या के जिलाधिकारी और मैं खुद उपस्थित रहूंगा। कुछ प्रमुख बातें तय की जाएंगी। उन्होंने बताया कि हम श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की दिशा में एक-एक कदम आगे बढ़ रहे हैं। क्या-क्या होना चाहिए, हम इस पर अनवरत विचार कर रहे हैं। 

विहिप उपाध्यक्ष ने कहा कि मंदिर बड़े नहीं होते, उसका कॉरिडोर और कॉम्प्लेक्स बड़ा होता है। विहिप के प्रस्तावित मॉडल के अनुरूप कार्यशाला में पत्थरों की तराशी का काम चल रहा है। मॉडल में परिवर्तन हुआ तो मंदिर निर्माण में लगने वाला समय बढ़ जाएगा। राजस्थान से जो पत्थर मंगाए जाते थे, उस रंग का पत्थर अब उपलब्ध नहीं हो सकेगा। राजस्थान सरकार ने उसको फारेस्ट क्षेत्र घोषित कर दिया है। मंदिर कंक्रीट से नहीं बनेगा क्योंकि पत्थर से निर्मित होने वाले मंदिरों की उम्र कम से कम 500 साल तक होती है, जबकि कंक्रीट की उम्र सौ साल होती है। 

उल्लेखनीय है कि 19 फरवरी को ट्रस्ट के प्रथम ट्रस्टी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के. पाराशरण के दिल्ली स्थित ग्रेटर कैलाश आवास पर ट्रस्ट की बैठक हुई थी। यह ट्रस्ट की पहली बैठक थी, जिसमें अयोध्या की मणिराम दास जी छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष, विहिप उपाध्यक्ष राय को महासचिव और गोविंद देव गिरी जी महाराज को कोषाध्यक्ष चुना गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव रहे आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा को भवन निर्माण समिति का चेयरमैन चुना गया। 

ट्रस्ट की पहली बैठक में केंद्र के प्रतिनिधि के तौर पर अतिरिक्त सचिव गृह विभाग ज्ञानेश कुमार, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि अवनीश अवस्थी और अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा, महंत नृत्य गोपाल दास, के. पाराशरन, चम्पत राय, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी परमानंद महाराज, स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज, गोविंद देवगिरि, महंत दिनेंद्र दास, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, अनिल मिश्र और कामेश्वर चौपाल मौजूद थे।

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