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कॉलेजों में विषय बंद करने के विरोध में प्रदेशभर में आंदोलन चलाएगी एसएफआई

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 20-09-2019 17:23:46

एसएफआई ने हरियाणा सरकार की तरफ से 38 कॉलेजों में 100 से अधिक विषयों को बंद करने के फैसले की आलोचना करते हुए आज इसके खिलाफ प्रदेश भर में आंदोलन चलाने की घेषणा की।


सिरसा। स्टूडेंटस फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने हरियाणा सरकार की तरफ से 38 कॉलेजों में 100 से अधिक विषयों को बंद करने के फैसले की आलोचना करते हुए आज इसके खिलाफ प्रदेश भर में आंदोलन चलाने की घेषणा की।

एसएफआई की प्रदेशाध्यक्ष सुमन गढवाल ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि हरियाणा के जिन कॉलेजों में जिस भी विषय में 30 से कम विद्यार्थी हैं। उन विषयों को बंद कर दिया जाएगा। इसी के तहत एक सूची में पाया गया है कि हरियाणा के लगभग 38 कॉलेजों में 100 से अधिक विषयों में 30 से कम विद्यार्थी हैं, इसलिए सरकार के फैसले के अनुसार इन विषयों को इन कॉलेजों से बंद कर दिया जाएगा। 

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उन्होंने बताया कि इस फैसले से गरीब विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकेंगे क्योंकि जिन कॉलेजों में ये विषय बंद होने हैं वे कॉलेज ज्यादातर ब्लॉक स्तर पर हैं। जिन्हें बने हुए भी ज्यादा समय नहीं हुआ है और इन कॉलेजों में पहले ही सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि बहुत ही गरीब विद्यार्थी और खासकर लड़कियां जो दूर के कॉलेजों में पढ़ने के लिए नहीं जा सकते वे ही यहां दाखिला लेते हैं। इस फैसले के बाद ये विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित हो जाएंगे। जिन विषयों की सरकार ने सूची बनाई है उनमें ज्यादातर विषय साइंस और कॉमर्स से संबंधित हैं।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थी साइंस और कॉमर्स की पढ़ाई कम कर पाते हैं इस फैसले के बाद तो वे इससे भी वंचित रह जाएगें। उन्होंने बताया कि सरकार को करना तो यह चाहिए था कि इन सभी कॉलेजों में विद्यार्थियों को अच्छी सुविधाएं और अध्यापक प्रदान किए जाते ताकि विद्यार्थी अच्छे से अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और इन कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सके।

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एसएफआई प्रदेश सचिव सुरेंद्र ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार लगातार गरीब, दलित, महिला व शिक्षा विरोधी फैसले ले रही है। यह फैसला भी ऐसा ही है जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों, दलितों व महिलाओं को होगा। इसी प्रकार का फैसला सरकार ने इस शैक्षणिक स्तर के शुरुआत में भी लिया था जिसमें सभी कोर्सेज की फीस दो से तीन हजार बढ़ा दी थी लेकिन एसएफआई ने पूरे प्रदेश में इसके खिलाफ आंदोलन किया और बढ़ी हुई फीस को वापिस करवाया।

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