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आत्मनिर्भर भारत: पहले रिक्शा चलाया, बाद में पंचर, अब बेच रहे पत्ते

संजीवनी टुडे 03-06-2020 12:43:39

उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोजगार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्र से बहुत लोग आते हैं। कुछ लोग दूसरे के यहां काम करते हैं तो कुछ खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार शुरू करते हैं।


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोजगार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्र से बहुत लोग आते हैं। कुछ लोग दूसरे के यहां काम करते हैं तो कुछ खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार शुरू करते हैं। 

लखनऊ में एक ऐसे ही शख्स हैं जुम्मन चाचा। यह रहने वाले तो फैजाबाद के हैं, जो आजकल अयोध्या हो गया है। जुम्मन लखनऊ में लॉकडाउन के पहले तक रिक्शा चलाते थे। लॉकडाउन में रिक्शा खड़ा हो गया तो रोजी रोटी के लिए स्वयंसेवी संगठनों पर आश्रित हो गए। लॉकडाउन-4 में जुम्मन ने पंचर बनाना शुरू किया। इसमें उन्होंने ज्यादातर पुलिस वालों के वाहन का पंचर बनाया। खुद आत्मनिर्भर बनाने के लिए जुम्मन हर कोशिश करते रहे। 

इधर लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद उन्होंने पत्ते बीनने और बेचने का कार्य शुरू किया। पत्ते जिसे लोग अपने जानवरों के लिए खरीद कर ले जाते हैं। जुम्मन को इंतजार है, जब फिर से सड़क पर उनका रिक्शा उतरे और वह उससे मेहनत की रोटी खा सकें। लखनऊ में जुम्मन की तरह बहुत लोग हैं, जो किसी न किसी माध्यम से खुद को आत्म निर्भर बनाये हुए हैं। 

जुम्मन से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह दिनरात रिक्शा चलाकर चार पैसे जोड़ते रहे हैं। खुले छत के नीचे सोते हैं और खुले में ही नहाते हैं। मेहनत की रोटी खाकर जीना चाहते हैं।

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