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कांधला में घोटाला: न विकास हुआ, न सामान की आपूर्ति और 21 लाख का कर दिया भुगतान

संजीवनी टुडे 04-06-2020 18:46:04

भष्ट्राचारियों को ना सरकारी नियम कायदे कोई लेन देना है, उन्हें तो केवल फायदा देखना है और अधिकाधिक हित साधना है। या यूं कहें कि सरकार बदल सकती है, जमाना बदल सकता है।


शामली। भष्ट्राचारियों को ना सरकारी नियम कायदे कोई लेन देना है, उन्हें तो केवल फायदा देखना है और अधिकाधिक हित साधना है। या यूं कहें कि सरकार बदल सकती है, जमाना बदल सकता है। लेकिन ये भ्रष्टाचारी नहीं बदल सकते हैं। अगर बंदरबांट न हो तो आम लोगों तक सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंच सकता है।

मनरेगा के तहत 19 गांवों में सामान की आपूर्ति के नाम पर 21 लाख रुपये हड़पने का मामला सामाने आया है। मामले की जांच के बाद बीडीओ व सहायक लेखाकार के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर को नौकरी से निकाल दिया गया है। अन्य कारवाई के लिए मामले की जांच चल रही है।

आश्चर्य यह कि कोई सामान खरीदा नहीं गया और सिस्टम से 21 लाख का भुगतान हो गया है। आलाधिकारियों को मामले का पता चलने के बाद फर्म से पैसा वापस करा लिया गया है। लेकिन छिद्रयुक्त इस सिस्टम के कारण बेलगाम अधिकारियों के कारनामों में 21 लाख के घोटाले का एक और अध्याय जुड़ गया है। देश में फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते पूरे देश मे लॉकडाउन चल रहा था। इसी बीच भ्रष्टाचारी अधिकारियों ने एक कारनामा कर डाला। दरअसल,मनरेगा योजना के तहत कांधला क्षेत्र के 19 गांवाें में सामान की आपूर्ति के नाम पर वर्ष 2019-20 तथा 2020-21 में 36 लाख 46 हजार रुपये का भुगतान डोंगल के माध्यम से राजेन्द्र प्रसाद सहायक लेखाकार और बीडीओ कांधला सुभाष चंद ने किया। 

इस बड़े भुगतान को देखते हुए आलाधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। पीडी ज्ञानेश्वर तिवारी ने बताया कि जब मामले में जांच की गई तो करीब 21 लाख रुपये के घोटाले का सामने आया। पीडी ने बताया कि 19 गांवों में आपूर्ति के सामान खरीदने के नाम पर करीब 21 लाख रुपये का भुगतान पांच फर्मों के खातों में कर दिया गया। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के बाद बीडीओ कांधला सुभाष चंद व सहायक लेखाकर राजेन्द्र प्रसाद की निलंबन और विभागीय कार्यवाही के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। उन्होंने बताया कि बिना सामान खरीदे जिनके खातों में पैसे भेजे गए थे। उन सभी ने विभाग के खाते में पूर्ण धनराशि को जमा कर दी है। विभाग की ओर से उन सभी फर्मों को भी नोटिस भेज दिया गया है।

विभाग से किए गए भुगतान की रिकवरी हो गई है। इस पूरे मामले में गंभीर बात तो यह सामने आई है कि जिन 19 गांवों में निर्माण सामग्री की आपूर्ति दर्शायी थी लेकिन गांवों में ऐसा कोई भी विकास कार्य नही मिला। पूरे मामले में एक पूर्व अधिकारी ने जांच भी शुरू कर दी है। डीएम जसजीत कौर ने बताया कि इस प्रकरण में कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया है। 

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