संजीवनी टुडे

सारदा चिटफंड : देवयानी की डायरी, लैपटॉप और फोन अभी भी पुलिस के पास

संजीवनी टुडे 12-07-2019 12:03:36

न्यायालय के निर्देश पर इसकी जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों के हाथ अभी तक इस चिटफंड कम्पनी के मालिकों द्वारा इस्तेमाल होने वाला लैपटॉप, मोबाइल फोन और डायरी तक नहीं लगी है।


कोलकाता। अरबों रुपये के सारदा चिटफंड घोटाला मामले में विगत पांच सालों से जांच चल रही है। न्यायालय के निर्देश पर इसकी जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों के हाथ अभी तक इस चिटफंड कम्पनी के मालिकों द्वारा इस्तेमाल होने वाला लैपटॉप, मोबाइल फोन और डायरी तक नहीं लगी है। यह दावा है जांच में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों का। 

शुक्रवार को जांच एजेंसी के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि चिटफंड समूह के आर्थिक लेन-देन से संबंधित ब्यौरा एक लैपटॉप में रखा जाता था। उस लैपटॉप को संभालने की जिम्मेदारी सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन की सहयोगी देवयानी मुखर्जी की थी। इसके अलावा देवयानी के दो मोबाइल फोन थे जिस पर उन बड़े नेताओं के फोन भी आते थे जो कथित तौर पर इस चिटफंड घोटाला से लाभान्वित हुए हैं। इसमें सत्तारूढ़ तृणमूल के कई शीर्ष नेताओं के संलिप्त होने का भी दावा किया जा रहा है। 

सारदा समूह का बैंक से होने वाला आर्थिक लेन-देन पूरी तरह से देवयानी देखती थी और उसका रिकॉर्ड लैपटॉप में रखने के साथ-साथ वह डायरी में भी सारा ब्यौरा लिखकर रखती थी। किसे कितने पैसे, कब, क्यों दिए गए आदि का जिक्र उसमें होता था। दावा है कि 2013 में जब सारदा चिटफंड समूह के खिलाफ माहौल बनने लगा और ऐसा प्रतीत होने लगा था कि इसके खिलाफ जांच हो सकती है तब चिटफंड समूह के मालिक और अन्य अधिकारी सतर्क हो गए थे। 

कथित तौर पर सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन, देवयानी और अन्य अधिकारियों के साथ सत्तारूढ़ तृणमूल के शीर्ष नेताओं की बैठक हुई और नौ अप्रैल 2013 को देवयानी को साथ लेकर सुदीप्त सेन बंगाल से फरार हो गए थे। तब सुदीप्त के निर्देश पर ही देवयानी वह लेपटॉप, डायरी और अपना दोनों फोन लेकर गई थी। कुछ दिनों बाद कश्मीर के सोनमार्ग से पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने इन दोनों को गिरफ्तार किया था। एसआईटी के प्रमुख विधाननगर के तत्कालीन पुलिस आयुक्त आईपीएस राजीव कुमार थे। 

दोनों की गिरफ्तारी के बाद उनके पास से लैपटॉप, डायरी और उनके फोन भी बरामद कर लिए गए थे। उसके बाद 2014 में कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी आज तक पुलिस ने वह डायरी, लैपटॉप और देवयानी का दोनों फोन नहीं दिया है। इस मामले में एसआईटी के कई अधिकारियों से लगातार पूछताछ हुई है जिसमें राजीव कुमार भी शामिल हैं लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ भी जानकारी होने से इनकार कर दिया है। 

एक तरफ एसआईटी के अधिकारी इस तरह की किसी डायरी, लैपटॉप अथवा फोन के बारे में जानकारी होने से इनकार कर रहे हैं तो दूसरी तरफ विगत दो दिनों के अंदर सीबीआई प्रेसिडेंसी जेल में जाकर देवयानी मुखर्जी से करीब नौ घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। इसमें उसने अपनी डायरी, फोन और लैपटॉप के बारे में जिक्र किया है। उसने बताया है कि एसआईटी ने वे सारी चीजें जब्त कर ली थी। 

अब सीबीआई जेल में ही जाकर सुदीप्त सेन से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है ताकि दोनों का बयान रिकॉर्ड कर एसआईटी के अधिकारियों को घेरा जा सके। यह भी दावा है कि सारदा समूह के सॉल्टलेक मिडलैंड पार्क स्थित दफ्तर और दक्षिण 24 परगना के विष्णुपुरी स्थित सारदा गार्डन में भी तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए थे जिसमें संलिप्त लोगों की सूची थी लेकिन एसआईटी ने उसे भी गायब कर दिया है। 

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