संजीवनी टुडे

सांभर झील: हजारों किमी. से आये प्रवासी पक्षी अब हमेशा-हमेशा के लिए मिट्टी में तब्दील हो गए

संजीवनी टुडे 19-11-2019 22:34:33

सांभर झील पक्षियों के लिए कब्रगाह बना हुआ है। जहां देखो वहां रेत पर पक्षियों के मरने के अवशेष दिख रहे हैं। मरने वाले कई पक्षी तो 5000 किलोमीटर की उड़ान भरकर अपने पसंदीदा सांभर झील पहुंचे थे।


जयपुर। सांभर झील पक्षियों के लिए कब्रगाह बना हुआ है। जहां देखो वहां रेत पर पक्षियों के मरने के अवशेष दिख रहे हैं।  मरने वाले कई पक्षी तो 5000 किलोमीटर की उड़ान भरकर अपने पसंदीदा सांभर झील पहुंचे थे। कई लैब में इनकी मौत की वजह की जांच की गई है, लेकिन अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई हैं। विभाग जी जान से हालात काबू में लाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन परिंदों की परींदों की मौत का सिलसिला अभी थमा नहीं है। राजस्थान की सांभर झील 18 हजार से अधिक देशी-विदेशी पक्षियों की कब्रगाह बन चुकी है। 

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प्रशासन प्रतिदिन सांभर झील से बीमार एवं मृत पक्षियों को निकाल कर पास ही खाली स्थान पर दफना रहा है। हालात यह है कि बड़ी संख्या में पक्षी नमक में गल गए और उनमें कीड़े लग गए, जिसके चलते दूसरे पक्षियों की सेहत बिगड़ने लगी है। घायल हैं उनको बचाने की कोशिश की जा रही है। सांभर झील में प्रतिवर्ष 85 प्रजातियों के पक्षी आते हैं। इस बार भी ये आए, लेकिन 32 प्रजातियों के पक्षियों की इनमें से मौत हो गई। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते तीन दिनों से जेसीबी से गड्ढा खोदकर पक्षियों को जमीन में दफनाया जा रहा है। 

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कई मृत पक्षी कीचड़ में सड़ने लगे है। इससे दूसरे पक्षियों की भी सेहत बिगड़ने की शंका है। जयपुर से 80 किलोमीटर दूर स्थित ये झील राजस्थान के नमक उत्पादन का मेन सोर्स है। बीकानेर के अपेक्स सेंटर के प्रो.एके कटारिया की मानें तो एवियन बोटुलिज्म बीमारी के कारण सांभर झील बड़ी संख्या में पक्षियों की कब्रगाह बनी है। बीमारी वाला कीड़ा मेगट्स खाने से पक्षियों में लकवे जैसे हालात बन गए। पानी में डूबने और जमीन पर पड़े-पड़े ही पक्षियों ने दम तोड़ दिया। एवियन बोटुलिज्म का जीवाणु फैलने के कारण सभी पक्षियों में यह बीमारी तेजी से फैली, क्योंकि सांभर झील में आने वाले अधिकांश पक्षी मांसाहारी हैं। मेगट्स कीड़ा ​खाने के बाद पक्षी लकवाग्रस्त हो गए थे।

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