संजीवनी टुडे

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त झाड़ियों में तब्दील हो गए उप केन्द्र!

संजीवनी टुडे 18-07-2019 11:00:38

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत ग्रामीण अंचलों में करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए उपकेंद्र उपयोग में आने से पहले खंडहर में तब्दील हो गए हैं।


गोण्डा। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत ग्रामीण अंचलों में करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए उपकेंद्र उपयोग में आने से पहले खंडहर में तब्दील हो गए हैं। अधिकांश उपकेंद्रों को झाड़ियों ने अपने आगोश में ले लिया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में कागजों पर यह केंद्र संचालित ही नहीं है बल्कि यहां पर प्रसव भी होता है।

 ग्रामीणों को गांव में ही स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य से बनाए गए उप केंद्र अपने उद्देश्यों से भटक गए। वर्ष 2007 से वर्ष 2011 तक जिले में 3 फेज में करीब 366 उप केंद्रों के निर्माण के लिए जमीन का चिन्हांकन किया गया। जिसमें 322 उप केंद्र बन कर तैयार हो गए। इन उप केंद्रों के निर्माण की जिम्मेदारी सीएनडीएस व राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई थी। निर्माण के मानकों में इस कदर अनदेखी की गई। अधिकांश उप केंद्र विभाग को सौंपने से पहले खंडहर में तब्दील हो गए। बाद में कार्यदायी संस्थाओं ने इन उप केंद्रों को एन केन प्रकारेण विभाग को सौंप दिया।

 विभाग ने इन उप केंद्रों पर एक एएनएम व आशा बहुओं की तैनाती कर दी। उद्देश्य था कि यहां पर प्रतिदिन एएनएम व आशा बहुएं बैठकर गर्भवती महिलाओं व बच्चों का इलाज करेंगी। आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इन उपकेंद्रों पर प्रसव कक्ष भी बनाए गए थे ताकि ग्रामीण अंचल की महिलाओं को प्रसव के लिए कहीं जाना ना पड़े। इन सब व्यवस्थाओं के बावजूद जिले के किसी भी उपकेंद्र पर आज तक कोई भी संस्थागत प्रसव नहीं हुआ। हालत यह है कि जिन की तैनाती की गई है वह खुद उपकेंद्र पर जाती ही नहीं है। इस बात की गवाह उप केंद्रों पर उगी झाड़ियों खुद बयां कर रही हैं। 

   विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो अभी 2011 से अब तक करीब 8 वर्षों में 44 केंद्रों का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जा सका है, 20 निर्माणाधीन है जबकि 24 पर अभी तक काम ही नहीं शुरू हो सका है। अब यहां उपकेंद्र चोर उचक्के अड्डा बन गए हैं। बनघुसरा उपकेंद्र पर नशेड़ियों का जमावड़ा होता है और यह केंद्र पूरी तरह से झाड़ियों में तब्दील हो गया है। खिड़की दरवाजे टूट चुके हैं। उप केंद्रों के हाल कहां तक बयां किए जा।

  रुपईडीह विकासखंड के ग्राम पंचायत बिछुड़ी में वर्ष 2008-2009 में बना उपकेंद्र खंडहर होने के साथ-साथ झाड़ियों ने इसे अपने आगोश में ले लिया है। खिड़की दरवाजे भी गायब हो चुके हैं। कमोबेश यही स्थिति इटियाथोक विकासखंड के अयाह गांव की है। 

  इस संबंध में प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा इसकी जांच कराई जाएगी और जिन कर्मचारियों की तैनाती की गई है, अगर वह केंद्र पर नहीं जाती है तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

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