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एक साथ दो अर्थियां उठने से घुमंतू परिवारों में मचा कोहराम

संजीवनी टुडे 31-05-2020 14:52:56

लॉकडाउन के बाद से शुरू हुई भूख और बीमारी की जंग से कुछबंधियन पुरवा के घुमंतू मनोहर व राजकुमार हार गए। रविवार के दिन दोनों की अर्थी उठी।


बांदा। लॉकडाउन के बाद से शुरू हुई भूख और बीमारी की जंग से कुछबंधियन पुरवा के घुमंतू मनोहर व राजकुमार हार गए। रविवार के दिन दोनों की अर्थी उठी। गांव वासियों ने चंदा करके दोनों का अंतिम संस्कार किया। इनके घरों में कई दिनों से चूल्हे नहीं जले थे। दोनों ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से मदद की गुहार भी लगाई थी। इन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं मिल पाई।

न चूल्हा जला न हो पाया इलाज
मनोहर का पुत्र रमेश बताता है कि हम लोग गांव में घूम घूम कर गुंडी सिकदर बनाकर जांत चकरी तांक कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। किंतु लाकडाउन के बाद कहीं जा नहीं पाए, जिससे रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो गई। भुखमरी के कारण पिता की बीमारी ने जोर पकड़ लिया। हम न तो चूल्हा जला पाए और न ही उनका इलाज करा पाए। जब घर में कुछ न तो खाने के लिए था और न ही इलाज के लिए एक धेला था, ऐसे में अपने कच्चे मकान के 300 खपरा 600 रुपये में बेचा और इलाज कराने बांदा ले गए। लेकिन इलाज नहीं हो पाया इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई। अब हमारा मकान भी बरसात में गिर जाएगा।

खाना नहीं मिला तो पानी पी कर सो गए 
राजकुमार की मौत के बाद उसके बच्चों का बुरा हाल है। 38 वर्षीय राजकुमार को भी पिछले कई वर्षों से टीबी थी। उसका इलाज इलाहाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में चलता था। लॉकडाउन के बाद वह अपना इलाज कराने नहीं जा पाया। उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी थी। कई बार पानी पीकर ही सोना पड़ता था। इलाज और अनाज के अभाव में आज राजकुमार की भी जीवन लीला समाप्त हो गई।

अब नौ की जिंदगी खतरे में 
टीबी और भुखमरी से इस क्षेत्र में दो सप्ताह के अंदर चार मौतें हो गई हैं। 5 दिन पहले कुछबंधियन पुरवा के एक ही परिवार में दो मौतें हुई थी। दोनों रिश्ते में सास बहू थी और टीबी रोग से ग्रसित थी। घर में भुखमरी के हालात थे, कुछबंधियन  पुरवा में अभी भी 9 लोग ऐसे हैं जो गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, जिनका इलाज नहीं हो पा रहा है। 

मदद के लिए की थी भूख हड़ताल
लॉकडाउन के दौरान यहां के घुमंतू परिवारों को किसी तरह की मदद नहीं मिल रही थी। राशन कार्ड भी नहीं बने थे। इसके लिए घुमंतू परिवार ने अनशन किया था। बाद में सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी में इन परिवारों को न सिर्फ राशन किट बांटी थी बल्कि राशन कार्ड बनवाने का भी भरोसा दिया था। 

मददगार बनी रही एक संस्था
लॉकडाउन में सरकारी मदद से वंचित घुमंतू परिवारों की मदद काफी हद तक विद्या धाम समिति द्वारा की जा रही थी। इस सम्बंध में विद्या धाम समिति के मंत्री राजा भैया बताते हैं कि बहुत से लोग गांव में गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। जिनका इलाज नहीं हो पा रहा है। इलाज के अभाव में यह लोग दम तोड़ देते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम टीबी जैसे गंभीर बीमारियों से ग्रसित रोगियों की उपेक्षा कर रही है।

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