संजीवनी टुडे

गांव लौट स्वस्थ्य भारत के निर्माण की बुनियाद खड़ी कर रहे आरके सिन्हा

संजीवनी टुडे 10-06-2019 15:52:43

बिहार के लोग मेहनती हैं,बुद्धिमान हैं, नेतृत्व करना जानते हैं और यही वजह है कि बिहार के लोग आर्थिक अभाव और संसाधनों की कमी के बीच रोजगार की तलाश में जहां भी गए वहां उन लोगों ने सफलता का झंडा गाड़ दिया और अपनी मेहनत,बुद्धि और नेतृत्व का परचम लहरा दिया। बिहार के लोग दिल्ली


आरा। बिहार के लोग मेहनती हैं,बुद्धिमान हैं, नेतृत्व करना जानते हैं और यही वजह है कि बिहार के लोग आर्थिक अभाव और संसाधनों की कमी के बीच रोजगार की तलाश में जहां भी गए वहां उन लोगों ने सफलता का झंडा गाड़ दिया और अपनी मेहनत,बुद्धि और नेतृत्व का परचम लहरा दिया। बिहार के लोग दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र,पंजाब,पश्चिम बंगाल, केरल,आंध्र प्रदेश,तमिलनाडु जहां भी गए वहां सफलता का मुकाम हासिल किया और लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त करने का बीड़ा भी उठाया। 

बिहार के सुदूरवर्ती गांवों से आर्थिक तंगहाली के बीच निकल दूसरे राज्यों में अपना साम्राज्य खड़ा करने वाले बहुतेरे लोग महानगरों की चकाचौंध में ऐसे खो गए कि उन्हें अपने बचपन की दुनिया ही याद नहीं रही।कभी गांव की गलियों, खेत-खलिहानों, बाग- बगीचों,गांव की पगडंडियों पर चहल कदमी करने वाले ऐसे लोगों को सफलता के मुकाम हासिल होने के बाद  गांव याद नहीं रहे। वर्षों पहले गांव छोड़ा तो फिर मुड़कर उस सुनहरे अतीत की  याद उन्हें आई ही नहीं ।गांव में बचपन बिताने वाले दोस्त छूट गए,गांव छूट गए,गांव के बचपन की यादें छूट गयीं और छूट गए वे सब कुछ जिनके कारण कभी जिंदगी की कठिनाइयों ने जीवन में उन्हें कुछ कर गुजरने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी। लेकिन बिहार के भोजपुर की मिट्टी के एक शख्स की कहानी इन सब से कुछ अलग  है। भोजपुर की  मिट्टी के इस शख्स का नाम रवीन्द्र किशोर सिन्हा है। लोग इन्हें आर के सिन्हा के नाम से जानते हैं। 
बिहार  के पुराने शाहाबाद से अलग होने के बाद भोजपुर के नाम से बने जिले का एक गांव है बहियारा। सोन नद की कलकल करती जलधारा से ठीक ऊपर बसे इस गांव की छटा देखते ही बनती है।कोइलवर रेल सह सड़क पुल से ठीक दक्षिण करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर बसा बहियारा गांव अब इतिहास रचने को बेताब है।
बहियारा ही वह गांव है जहां की सुनहरी मिट्टी और रेत ने आरके सिन्हा को संघर्ष के रास्तों पर चलना सिखाया है।बहियारा ही वह गांव है जिसके नीचे सोन की कलकल करती जलधारा ने आरके सिन्हा को जीवन में निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।बहियारा से निकल कर जब आरके सिन्हा ने पटना में अंग्रेजी दैनिक  'सर्चलाइट'  से पत्रकारिता की दुनिया मे प्रवेश किया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपर्क में आए तो उनके आलेखों से सत्तर के दशक में सत्तारूढ़ कांग्रेसी सरकार की बेचैनी बढ़ गई थी। आर के सिन्हा की पत्रकारिता ने कांग्रेस सरकार की चूलें हिला दी थीं।उन्हें कांग्रेस की घृणित राजनीति का खामियाजा भुगतना पड़ा और अन्ततः 'सर्चलाइट' की नौकरी से उन्हें निकाल दिया गया। 

पत्रकारिता की नौकरी छूट जाने के बाद उनके सामने आर्थिक कठिनाइयां अब मुंह बाए खड़ी थीं। ऐसे में उनके किसी शुभचिंतक ने उनसे सिक्युरिटी सर्विस खोलने की सलाह दी। 1974-75 के आसपास आर्थिक कठिनाइयों के बीच महज तीन सौ रुपये इकट्ठे कर आरके सिन्हा ने पटना के एक छोटे से गैराज को भाड़े पर लेकर सिक्युरिटी सर्विस की स्थापना कर डाली। 

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नही देखा। एसआइएस सिक्युरिटीज एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज के नाम से निजी सुरक्षा एजेंसी की स्थापना कर उन्होंने इसे आगे बढ़ाने के लिए दिन रात एक कर दिया। कभी कभी भूखे और प्यासे भी रहे लेकिन एसआइएस को बुलंदियों पर पहुंचाने का सिलसिला अनवरत जारी रहा।
अस्सी के दशक में एसआइएस ने सफलता का झंडा गाड़ना शुरू किया तो नब्बे के दशक में एसआइएस ने आरके सिन्हा को नई ताकत दी।अब एसआइएस देश के कोने -कोने तक अपना नेटवर्क तैयार कर चुका था। वर्ष 2018 आते -आते एसआइएस  न सिर्फ भारत बल्कि ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर सहित दुनिया के कई देशों में अपनी जड़ें जमा चुका है और अकेले सिर्फ भारत मे दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दे रहा है।एसआइएस की बदौलत आरके सिन्हा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बीस लाख से अधिक लोगों की  भारत में रोजी -रोटी की व्यवस्था कर देश की प्रगति और विकास में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सान्निध्य में बतौर स्वयंसेवक आरके सिन्हा वर्ष 1966 में जनसंघ से जुड़े और तब उनके अतिप्रिय लोगों में शामिल थे। 

बिहार के भोजपुर के बहियारा गांव में विशाल ऑर्गेनिक फार्मिंग और जैविक खाद उत्पादन का प्लांट लगाया गया है। आरके सिन्हा की पहल पर देश के बड़े कृषि वैज्ञानिक दीपक नरवड़े जैसे वैज्ञानिक समय- समय पर यहां आते हैं और किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिंग का प्रशिक्षण देकर विष रहित खेती करने के लिए उन्हें प्रेरित करते हैं। यहां से सीख लेकर भोजपुर सहित बक्सर और अन्य इलाकों में किसान जैविक खेती करना शुरू कर चुके हैं। बहियारा में ऑर्गेनिक फार्मिंग से तैयार उत्पाद और फल सब्जियां आद्या मिल्क एंड ऑर्गेनिक प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से बाजारों तक भी अब पहुंच रही हैं और बड़े पैमाने पर बाजारों में इसकी मांग बढ़ रही है। 

आद्या मिल्क एंड ऑर्गेनिक प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रबंध निदेशक(एमडी) पल्लवी सिन्हा ने दावा किया है कि हमारा उत्पाद शत प्रतिशत शुद्ध और ऑर्गेनिक है और आने वाले दिनों में आद्या से निर्मित उत्पाद आम आदमी की जिंदगी को बदल कर रख देगा। आने वाले समय में यह उत्पाद भारत की नई पीढ़ी को रोगमुक्त कर नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा और यह स्वस्थ भारत निर्माण का वाहक बनेगा। 

आरके सिन्हा की पहल अब रंग लाने लगी है । लोग ऑर्गेनिक फार्मिंग और देशी गायों के विस्तार को लेकर आगे आ रहे हैं।बिजनेस और राजनीति की दुनिया में पाताल से आसमान तक का सफर तय करने वाले आरके सिन्हा वापस अपने गांव बहियारा लौट कर स्वस्थ,सम्पन्न और विकसित भारत के निर्माण की बुनियाद रखने का अभियान चला रहे हैं।

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