संजीवनी टुडे

आरक्षण सिर्फ आर्थिक नहीं प्रतिनिधित्व का सवाल है : सुदेश महतो

संजीवनी टुडे 17-02-2019 20:52:59


रांची। आजसू प्रमुख सुदेश कुमार महतो ने कहा कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक आधार का नहीं प्रतिनिधित्व और भागीदारी का सवाल है। साथ ही हिस्सेदारी का मसला है। आर्थिक तौर पर इसे जोड़ कर देखा जाना या इस मुद्दे पर किसी तरह का कदम उठाया जाना बड़ी आबादी के हितों के साथ न्याय नहीं हो सकता है। महतो रविवार को यहां अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग सभा और अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा के बैनर तले राष्ट्रीय अधिवेशन सह प्रतिनिधि सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि वे बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गरीब सवर्णों को दिए गए आरक्षण के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। लेकिन इस प्रदेश में एक बड़ा वर्ग संवैधानिक निर्णय का इंतेजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन और सम्मेलन के जरिए पहले से इस विषय पर छिड़ी बहस को वे बड़े दायरे में ले जाना चाहते हैं। क्योंकि पिछड़ा वर्ग अपनी आबादी के हिसाब से संवैधानिक अधिकार पाने का हकदार है, जिसे वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण के सवाल को बार-बार आर्थिक तानाबाना से जोड़ कर देखा जाता है। जबकि ज्यादा जोर इन बातों पर हो कि नौकरियों में नियुक्तियां और शिक्षण संस्थानों में दाखिले की भागीदारी सुनिश्चित हो और प्रतिनिधित्व करने का सीधा मौका भी। तभी बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की नीति-सिद्धांत और सपने साकार हो सकते हैं। इस दिशा में संसद को भी संकीर्ण और दलीय दायरे से बाहर निकलकर पारदर्शिता और निष्पक्षता से सोचना होगा और फैसला लेना होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर झारखंड पिछड़ा वर्ग महसभा लगातार आवाज उठाती रही है। साथ ही इस मांग पर जोर दी जाती रही है कि ’जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी हिस्सेदारी’। इसके अलावा राज्य के 13 जिलों में जो रोस्टर प्रणाली लागू की गई है, उसमें तत्काल सुधार किए जाने की जरूरत है।

महतो ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर और झारखंड राज्य में सामाजिक आर्थिक जनगणना की गई है। जिसको तत्काल सार्वजनिक किया जाय। उस जनगणना में पैसे भी खर्च हुए होंगे. फिर किन परिस्थितियों में उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इनके अलावा पिछड़ा वर्ग के युवाओं का आक्रोश भी जाहिर है कि मेधा सूची में जो लोग आते हैं उन्हें भी कोटा में सीमित कर दिया जाता है। जबकि मेधा सूची में उपर रहने वालों को सामान्य श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं कर उनका हक तो मारा ही जा रही है। उन्हें अपने वर्ग का प्रतिनिधित्व करने से भी रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजाति, अनुसचित जाति और मुस्लिम वर्ग का बड़ा हिस्सा आर्थिक आधार पर कमजोर है। यह किसी से छुपा नहीं है और सरकारें भी इससे वाकिफ है। तब ये पूछा जा सकता है कि ये तस्वीर कैसे बदलेगी। यह तभी संभव है जब आरक्षण के केंद्र में पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व करने के अवसर दिए जाये।

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सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप ढोबले ने कहा है कि बिरसा मुंडा की धरती पर आए हैं। इसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। झारखंड में पिछड़ा वर्ग को मुक्कमल आरक्षण देने के लिए हम राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की सरकार सचेत हो जाए। मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए उनका संघ पूरे देश में संघर्ष करता रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में 14 पिछड़ों को 14 प्रतिशत आरक्षण इसलिए दिया जा रहा है कि सरकारी नौकरी तथा शैक्षणिक संस्थानों में पिछड़ा वर्ग को भागीदारी से वंचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में 68 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है. देश में दूसरे राज्यों में 69 से 72 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुदेश कुमार महतो पिछड़े वर्ग की नुमाइंदगी कर रहे हैं, तो यह मुहिम जरूर सफल होगी।

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महाधिवेशन में पारित किए गए प्रस्ताव-
झारखण्ड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। अनुसूचित जाति को 14 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। मंडल आयोग के सभी सिफारिशों को देश में लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। सरकारी एवं अर्धसरकारी क्षेत्रों के साथ-साथ निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव पारित करने सहित अन्य शामिल हैं। सम्मेलन से पूर्व जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखा। सम्मेलन में अखिल भारतीय पिछड़ा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रदीप ढोबले, पूर्व डीआईजी सुबोध प्रसाद, इंद्र कुमार सिंह चंदापुरी, एआईबीसीएफ उत्तरप्रदेश के संयोजक डॉ कौशलेंद्र, चन्नेई से जी करूणानिधि, मूलनिवासी महिला संघ की सुमिता पाटिल, संघ के राष्ट्रीय महासचिव और झारखंड प्रभारी सुशील कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

 

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