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रांची: मंदिरों और पूजा पंडालों में लगी श्रद्धालुओं की भीड़

संजीवनी टुडे 24-10-2020 16:49:22

राजधानी रांची के पूजा पंडालों और मंदिरों में शनिवार को महाअष्टमी और नवमी को लेकर भक्तों की भारी भीड़ दिखी।


रांची। राजधानी रांची के पूजा पंडालों और मंदिरों में शनिवार को महाअष्टमी और नवमी को लेकर भक्तों की भारी भीड़ दिखी। कोरोना संक्रमण के वजह से इस बार जिला प्रशासन ने पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं के प्रवेश की अनुमति नहीं दी है। साथ ही प्रशासन की ओर से सोशल डिस्टेंस का पालन करने की अपील की जा रही है। 

इसके बावजूद मंदिरों और पूजा पंडालों में भीड़ लगी रही। रांची के कोकर के मंदिर और पंडाल, रातू रोड, हरमू रोड, बकरी बाजार, रेलवे स्टेशन रोड आदि जगह पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गयी। अल्बर्ट एक्का चौक स्थित दुर्गा बाड़ी हनुमान मंदिर में भी लोग पूजा करते दिखे। पूजा पंडालों में पुलिस बल और समिति के कार्यकर्ता तैनात दिखे। अपर बाजार स्थित बकरी बाजार भारतीय नवयुवक संघ के पूजा पंडाल में शनिवार को श्रद्धालु पहुंचे। लेकिन उन्हें पंडाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी। 

इसके अलावा हरमू रोड स्थित सत्य अमरलोक पूजा पंडाल के बाहर बोर्ड लगाकर पंडाल के अंदर नहीं जाने का आग्रह किया गया था। अधिकतर पूजा पंडालों में लोग बाहर से ही माता के दर्शन कर आगे बढ़ते देखे गये। इस दौरान अधिकतर लोग मास्क पहने हुए दिखे। एक दो जगह छोड़कर सभी स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते भी लोग देखे गये। पुलिसकर्मी लोगों को एक जगह एकत्र होने पर लगातार हटने की अपील करते देखे गए।

पूजा पंडालों को किया जा रहा है सेनेटाइज
राजधानी रांची में पूजा पंडालों के पास लगातार सेनेटाइज किया है रहा है। उप नगर आयुक्त शंकर यादव ने बताया कि लगातार पूजा पंडालों में सेनेटाइज करने का काम कराया जा रहा है।

72 साल के बाद पहली बार नहीं होगा रावण दहन आयोजित
राजधानी रांची में वर्ष 1948 से शुरू हुए रावण दहन 72 साल के बाद पहली बार आयोजित नहीं होगा। देश के विभाजन के दौरान पाकिस्तान से रांची पहुंचे पंजाबी परिवारों ने रावण दहन की परंपरा की शुरुआत रांची में की थी उस वक्त तो यहां के खजुरिया तालाब स्थित गोस्सनर कॉलेज कैंपस के रिफ्यूजी कैंप में 12 से 15 पंजाबी परिवार रहते थे जिन्होंने रावण दहन के की शुरुआत की थी।

लेकिन कोरोना की वजह से इस वर्ष रावण दहन पर रोक लग गई है। राजधानी रांची में 70 फीट के रावण मेघनाथ और कुंभकरण की पुतले बनाकर रावण दहन का कार्यक्रम होता था। मोरहाबादी मैदान में आयोजित सबसे बड़े रावण दहन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि होते थे।    

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