संजीवनी टुडे

2017-18 के अंत में राजस्थान का राजकोषीय घाटा 25 हजार 342 करोड़ था

संजीवनी टुडे 18-07-2019 09:29:58

राजस्थान सरकार में वर्ष 2017-18 के अंत में 25 हजार 342 करोड़ रुपये का राजकोषीय तथा 18 हजार 535 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा था


जयपुर। राजस्थान सरकार में वर्ष 2017-18 के अंत में 25 हजार 342 करोड़ रुपये का राजकोषीय तथा 18 हजार 535 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा था तथा राजकोषीय देयतायें वर्ष 2013-14 के मुकाबले एक लाख 29 हजार 910 करोड़ से बढ़कर दो करोड़, 81 हजार 182 करोड़ रुपये हो गयी थी जो वर्ष 2016-17 के मुकाबले 10 प्रतिशत ज्यादा थी।

नियंत्रक महालेखा परीक्षक की वर्ष 2017-18 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की राजस्व प्राप्तियां वर्ष 2013-14 के 74 हजार 471 करोड़ रुपये से बढ़कर 2017-18 में एक लाख 27 हजार 307 करोड़ रुपये हो गई जो गत वर्ष के मुकाबले 18 हजार 281 करोड़ रुपये ज्यादा थी। राज्य का राजस्व व्यय गत वर्ष 2013-14 के 75 हजार 510 करोड़ से बढ़कर 2017-18 में एक लाख 45 हजार 842 करोड़ रुपये हो गया जिसमें गत वर्ष की तुलना में 18 हजार 702 करोड़ रुपये की वृद्धि थी। 

कुल राजस्व व्यय में वेतन तथा एवं भत्तों पर व्यय का अंश वर्ष 20-17 के 26़30 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 25़50 प्रतिशत हो गया। कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का अनुपात वर्ष 2016-17 के 15़ 83 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 16़ 41 प्रतिशत हो गया। जबकि सामाजिक तथा आर्थिक सेवाओं पर राजस्व व्यय में परिचालन तथा अनुरक्षण का अंश वर्ष 2016-17 में 1़ 19 प्रतिशत से घटकर 2017-18 में 0़91 प्रतिशत रह गया। 
 
247 अपूर्ण परियोजनाओं एवं कार्यों में व्यय राशि (20 हजार 175़99 करोड़ रुपये) राज्य के संचयी पूंजीगत व्यय (एक लाख 68 हजार 490़76 करोड़ रुपये) का 12 प्रतिशत थी। 39 परियोजनाओं में कुल लागत वृद्धि सात हजार 992 करोड़ रुपये थी। निर्धारित समय में परिेयाजना पूर्ण नहीं होने के कारण समाज को अपेक्षित लाभ मिलने में विलम्ब हुआ और गत वर्षों में परियोजनाओं की लागत में भी वृद्धि हुई। 

राज्य सरकार के वित्त लेखों के अनुसार राज्य सरकार के कुल निवेश में 49 कार्यशील सरकारी कम्पनियों में 44 हजार 281़ 63 करोड़ रुपये का निवेश भी सम्मिलित है। जिनमें से केवल आठ कम्पनियों ने 573़ 71 करोड़ रुपये के निवेश के समक्ष कुल 64़ 46 करोड़ रुपये का लाभांश घोषित किया। पांच बिजली कम्पनियों में राज्य सरकार का निवेश 41 हजार 442़ 76 करोड़ रुपये था जो राज्य सरकार के कुल निवेश का 91 प्रतिशत था। 

मार्च 2018 को रिण तथा प्रेषण (डीडीआर) शीर्षों के अंतर्गत 64 प्रकरणों में एक लाख 94़ 90 हजार करोड़ रुपये के प्रतिकूल शेष थे, जिनमें से एक हजार 31़ 52 करोड़ रुपये बीमा तथा पेंशन निधि के अंतर्गत नगरपालिका एवं नगर परिषद के कर्मचारियों की पेंशन निधि के थे। 

वित्तीय प्रबंधन तथा बजटरी नियंत्रण - वर्ष 2017-18 के दौरान कुल व्यय (एक लाख 79 हजार 473 करोड़ रुपये) का 42़ 37 प्रतिशत (76 हजार 35 करोड़) चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में किया गया जबकि अंतिम तिमाही में कुल प्राप्तियों (एक लाख 71 हजार 15 करोड़ रुपये) का केवल 37़ 68 प्रतिशत (64 हजार 442 करोड़) प्राप्त हुआ। यह व्यय वर्ष 2016-17 की अंतिम तिमाही के व्यय से 29़08 प्रतिशत (47 हजार 141 करोड़ से बढ़ा। इस प्रकार विभागों द्वारा चार चयनित जेण्डर बजटिंग योजनाओं में से एक में शून्य व्यय तथा शेष तीन में व्यय 24 से 67 प्रतिशत के बीच रहा जो राज्य सरकार द्वारा जेण्डर बजटिंग के क्रियान्वयन के बेहतर अनुश्रवण की आवश्यकता को दर्शाता है। 


कुल राजस्व व्यय में वेतन तथा भत्तों पर व्यय का अंश वर्ष 2016-17 के 26़ 30 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2917-18 में 29़ 50 प्रतिशत हो गया। बाद में कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का अनुपात वर्ष 2016-17 के 15़83 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 16़ 41 प्रतिशत हो गया। जबकि सामाजिक तथा आर्थिक सेवाओं पर राजस्व व्यय में परिचालन तथा अनुरक्षण का अंश वर्ष 2016-17 में 1़ 19 से घटकर वर्ष 2017-18 में 0़ 91 प्रतिशत रह गया। 

वर्ष 2017-18 के दौरान दो लाख 77़ 50 करोड़ रुपये के कुल अनुदानों तथा विनियोगों के समक्ष एक लाख 84 हजार 87़ 31 करोड़ रुपये का व्यय किया गया जिससे 15 हजार 990़ 19 करोड़ रुपये की बचत हुई। 28 प्रकरणों में तीन हजार 160़ 89 करोड़ पूरक प्रावधान किये गये जो अनावश्यक सिद्ध हुए।

विभागों द्वारा इन निधियों का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिये करने का अवसर नहीं छोड़ते हुए 15 हजार 799़ 52 करोड़ वित्त वर्ष के अंतिम कार्य दिवस को अभ्यिर्पित किये गये। 15 प्रकरणों में जहां बचत आठ हजार 782़ 39 करोड़ रुपये थी। राशि 302़ 80 करोड़ अभ्यर्पित नहीं की गई। 

प्लीज सब्सक्राइब यूट्यूब बटन

 

80 प्रकरणों में पांच हजार 940 करोड़ रुपये के एकमुश्त प्रावधान किये गये जिसमें से चार 707़ 59 करोड़ रुपये अप्रयुक्त रहे। नौ प्रकरणों में जिनमें आठ अनुदान शामिल थे, में गत तीन वर्षों के दौरान निरंतर बचतें 12़ 5 प्रतिशत से 59़ 7 प्रतिशत के मध्य रही। गत वर्षों में निरंतन बचतें राज्य सरकार द्वारा निधियों के अधिक निर्धारण की द्योतक थी। 30 जून 2018 को राशि 429़ 19 करोड़ के 134 सारांशिकृत आकस्मिक बिलों के विरुद्ध विस्तृत आकस्मिक बिल लम्बित थे। 

वित्तीय मामलों की रिपोर्ट -: 30 जून 2018 को वर्ष 2004-17 के दौरान प्रदत्त अनुदानों में से 2़ 34 करोड़ के 62 उपयोगिता प्रमाण पत्र बकाया थे। 10 उपक्रमों में उनके लेखाओं को अंतिम रुप दिया गया उस वित्तीय वर्ष तक जिनमें राज्य सरकार द्वारा 16 हजार 565़ 70 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। उनमें से लगातार पांच वर्षों से हानि में चल रहे आठ उपक्रमों की संचित हानि 12 हजार 211़ 94 रुपये रही। सरकारी धन के दुर्विनियोजन, चोरी तथा हानि के 67़ 73 करोड़ रुपये के 872 लम्बित मामलों में से 32 करोड़ रुपये के 320 मामलों में विभागीय तथा आपराधिक जांच प्रतिक्षित थी। बाद में 30़ 80 करोड़ रुपये के 491 प्रकरणों में वसूली अपलेखन के आदेश भी प्रतिक्षित थे।

गोवर्मेन्ट एप्रूव्ड प्लाट व फार्महाउस मात्र रु. 2600/- वर्गगज, टोंक रोड (NH-12) जयपुर में 9314166166

More From state

Trending Now
Recommended