संजीवनी टुडे

बजरी के विकल्प के रूप में ‘राजस्थान एम-सेण्ड नीति’ विचाराधीन-खान मंत्री

संजीवनी टुडे 16-07-2019 21:03:59

राजस्थान एम-सेण्ड नीति विचाराधीन है जो शीघ्र ही जारी की जायेगी।


जयपुर। खान मंत्री प्रमोद भाया ने कहा है कि प्रदेश में खनिज बजरी के दीर्घकालीन विकल्प के रूप में एम-सेण्ड के उपयोग बाबत् राजस्थान एम-सेण्ड नीति विचाराधीन है जो शीघ्र ही जारी की जायेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में निजी खातेदारी पर बजरी खनन पट्टों से संबंधित याचिका के न्यायालय से निस्तारण पश्चात् वर्तमान में खनन पट्टों हेतु स्वीकृतियां व खनन पट्टा आवंटन हेतु मंशा पत्र जारी किए गये हैं।

खान मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक राजेन्द्र राठौड़ के मूल प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा खातेदारी भूमि में संबंधित खातेदार को एक हेक्टेयर से चार हेक्टेयर क्षेत्रफल तक के खनन पट्टे आवंटन किये जा रहे है। राजकीय निर्माण विभाग के ठेकेदारों को खातेदारी भूमि में 1 हेक्टेयर तक के अल्पावधि अनुमति पत्र जारी किये जा रहे हैं।

भाया ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा खातेदारी भूमि में अप्रधान खनिज के एक से चार हेक्टेयर क्षेत्रफल तक के खनन पट्टे सम्बन्धित खातेदार को आवंटित किये जाने बाबत् अधिसूचना दिनांक 25.06.2018 से राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम, 2017 में संशोधन किया गया, परन्तु खातेदारी भूमि में बजरी खनन के संबंध में उक्त संशोधन की दिनांक को माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर का आदेश प्रभावी होने के कारण बजरी के खनन पट्टे आवंटित करने की कार्यवाही नहीं की जा सकी। संबंधित याचिका के माननीय न्यायालय से निस्तारण पश्चात् राज्य सरकार द्वारा दिनांक 08.01.2019 से खातेदारी भूमि में खनन पट्टे आवंटित करने की कार्यवाही करने बाबत् निर्देशित किया गया। वर्तमान तक 10 खनन पट्टों हेतु स्वीकृतियां जारी की गई है व खनन पट्टा आवंटन हेतु 216 मंशा पत्र जारी किये गये है।

उन्होंने बताया कि खनिज बजरी के संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय में लंबित प्रकरणों में प्रभावी पैरवी हेतु वरिष्ठ अधिवक्ता को नियुक्त कर इनके जल्द निस्तारण की कार्यवाही की जा रही है। वर्तमान में राज्य में खनिज बजरी के 97 खनन पट्टे प्रभावशील है।

इससे पहले पूरक प्रश्नों के जवाब में खान मंत्री ने बताया कि प्रदेश में निजी खातेदारी के मामलों में पुनर्भरण अध्ययन किया जाना जरूरी नहीं है। उन्होंने बताया कि 2012 तक कोई भी व्यक्ति प्रदेश मेे खनिज बजरी की रॉयल्टी और परमिट फीस का भुगतान कर बजरी का खनन कर सकता था परन्तु दीपक कुमार बनाम हरियाणा के प्रकरण में सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा 27/2/2012 के निर्णय अनुसार बजरी खनन हेतु अब कोई भी व्यक्ति खनन पट्टा स्वीकृत करवाकर एवं एन्वायर्नमेंटल क्लीयरेंस प्राप्त करके ही खनन कर सकता है। इसके लिए नियम बनाने के लिए राज्य सरकार को छह माह का समय दिया गया था।

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