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राजस्थान HC: हालात बिगड़ने की आशंका, जेल के अंदर ही आसाराम...

संजीवनी टुडे 17-04-2018 18:13:15


जोधपुर। यौन उत्पीडऩ आरोपी आसाराम के मामले में पुलिस ने जेल में ही फैसला सुनाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को इस पर सुनवाई के दौहरान जस्टिस जीके व्यास की खंडपीठ ने आसाराम का फैसला 25 अप्रेल को जेल में ही सुनाने के आदेश दिए है।  जोधपुर पुलिस ने इस फैसले लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। इससे पहले डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद पंचकुला में जबरदस्त हिंसक प्रदर्शन हुआ था। जिसमे पंचकुला में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दे दिया था। इसके बाद भड़की हिंसा में पंचकुला में 35 और सिरसा में छह लोग मारे गए थे।

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राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस की याचिका मंजूर करते हुए ये फैसला सुनाया है। राजस्थान पुलिस ने याचिका में कहा था कि आसाराम को लेकर आने वाले फैसले के दिन देशभर से हजारों की संख्या में आसाराम के समर्थक जोधपुर पहुंचेंगे, इससे स्थिति बिगड़ सकती है। आसाराम के समर्थकों के उग्र होने की आशंका जताई गई।  पंचकुला जैसे हालात जोधपुर में न हों इस लिए जिला पुलिस चिंता में थी। कोर्ट से आदेश मिलने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।

 सोमवार को एसटी-एससी कोर्ट, में पीडि़ता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी की ओर से धारा 340 के अंतर्गत पेश आवेदन पर सुनवाई पूरी हुई। पीठासीन अधिकारी मधुसुदन शर्मा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अर्जी पर आदेश आगामी 25 अप्रेल तक के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। और इसी दिन आसाराम मामले का फैसला सुनाया जायेगा। यौन उत्पीडऩ के आरोपी आसाराम के पछले साढ़े चार साल से जारी मामले की अंतिम सुनवाई के बाद 7 अप्रेल को एससी-एसटी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मधुसुदन शर्मा ने मामले का अंतिम निर्णय सुनाने के लिए 25 अप्रेल का दिन तय कर दिया था। वहीं उसी रोज पीडि़ता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने धारा 340 के अतंर्गत एक अर्जी भी कोर्ट में पेश की थी, जिस पर सोमवार को बहस भी हुई। इसके बाद अर्जी पर आदेश भी 25 अप्रेल के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।

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पीडि़ता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने आसाराम पर आरोप लगाया है कि कोर्ट मे पीडि़ता की उम्र को लेकर दो दस्तावेज आसाराम की ओर से पेश किए गए थे, जिसमें एक स्कूल की टीसी में कक्षा नर्सरी और प्रेप में पीडि़ता को पढऩा बताया गया है। टीसी के हिसाब से पीडि़ता घटना के समय नाबालिग नहीं बताई गई, चूंकि कोर्ट में कक्षा प्रेप व नर्सरी की टीसी सबूत के तौर पर काम नहीं आ सकती। इसके बाद इसी  स्कूल की एक और टीसी पेश की गई, जिसमें पीडि़ता को स्कूल में कक्षा नर्सरी, प्रेप, कक्षा एक व दूसरी में पढऩा बताया गया है। इन दोनों दस्तावेज में किसी के भी हस्ताक्षर नहीं है और न ही किसी प्रकार की मोहर लगी है।

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