संजीवनी टुडे

राजस्थान बजट/ आकड़ों की दिखेगी जादूगरी, वित्त मंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कड़ी परीक्षा

संजीवनी टुडे 18-02-2020 22:31:17

20 फरवरी को प्रदेश का आम बजट पेश होगा। जिसमें वित्त मंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बड़ी परीक्षा होगी। आर्थिक मंदी के दौर में कांग्रेस सरकार के जनघोषणा पत्र को साकार करने के लिए अतिरिक्त बजट और अन्य वृहद्ध योजनाओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना कड़ी चुनौति साबित होगा।


जयपुर। 20 फरवरी को प्रदेश का आम बजट पेश होगा। जिसमें वित्त मंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बड़ी परीक्षा होगी। आर्थिक मंदी के दौर में कांग्रेस सरकार के जनघोषणा पत्र को साकार करने के लिए अतिरिक्त बजट और अन्य वृहद्ध योजनाओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना कड़ी चुनौति साबित होगा। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक मान रहे है कि बजट केवल आकड़ों का खेल साबित हो सकता है। बजट से पहले जो ठोस धरातल पर कड़े फैसले लेने की जरूरत थी वो सरकार ने नहीं दिखाई है। 

उल्लेखनीय है कि बीते एक साल में प्रदेश के सरकारी विभागों में बजट की बात सामने आती रही है। अकेले पीएचईडी, पीडब्यूडी में संवेदकों के 500 करोड़ से ज्यादा बकाया बताया जा रहा है। ऐसे ही हालात दूसरे विभागों के है। बजट नहीं होने के कारण प्रस्तावित नई योजनाओं को सरकार हाथ में नहीं ले पा रही है तो पुरानी निर्माणधीन योजनाओं को सही समय पर पूरा करना चुनौति साबित हो रहा है। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कह चुके है कि केन्द्रीय बजट से प्रदेश को बेहतर आस थी जो पूरी नहीं हुई है वो इसे केन्द्र कीआर्थिक इमरजेंसी बता चुका है। इसका असर भरपूर राज्य की योनजाओं पर  पड़ेगा। ऐसे में प्रदेश की महत्वकांशी योजनाओं के आकार में कटौति होना तय है तो आधारभूत सुविधाओं सहित शहरों का सड़क तंत्र, पेयजल योजनाएं प्रभावित होंगी। वहीं सामाजिक सुरक्षाओं जैसी स्कीमों पर भी गहलोत सरकार को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है हालांकि बजट से पहले ही सरकार निवेश और नीलामी बड़े स्तर पर बढ़ावा देने का मानस बना चुकी है। पीपीपी मॉडल की झलक भी देखने को मिल सकती है। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकारों के टैक्स की राशि प्रभावित हुई है।

 राजस्थान में पूर्व वसुंधरा शासन के समय में भी केन्द्र से तारतम्य नहीं बैठ  पाने के कारण केन्द्रीय योजनाओं से राज्य के हिस्से का पूरा हक नहीं मिल पाया। अब प्रदेश में सरकार बदली है और कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की आर्थिक नीतियों पर लगातार हमलावर रही नीतियों के कारण यह माना जा रहा था कि केन्द्रीय योजनाओं से मिलने वाले राज्य की योजनाओं के मद में कटौति आ सकती है और केन्द्र के आम बजट में बड़ी कटौति सामने आ गई। ऐसे में राज्य को अब अपने संसाधनों का भरपूर इस्तमाल कर विकास कार्यों को गति देना होगा हालांकि प्रदेश के विकास कार्य अब दुगनी रफ्तार से गति पकड़ पाएंगे यह हो पाना मुश्किल दिख रहा है। 

सीएसएस की कई स्कीम्स में अपनी हिस्सा राशि की कटौती वित्त मंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तीसरे कार्यकाल का दूसरा बजट पेश में उनके लिए परिस्थितियां चुनौतिपूर्ण है। मंहगाई और मंदी की दौर के समय राजस्थानवासियों पर बिना ज्यादा आर्थिक भार लादे हुए संतुलित बजट प्रस्तुत करना आसान नहीं होगा। अभी बिजली के बढ़े दामों से लोगों का बजट गड़बड़ाया है तो केन्द्र के सिलेंडर के दाम में अचानक इतनी वृद्धि से महिलाएं नाराज है ऐसे में राज्य के बजट से हर वर्ग को उम्मीद है।

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