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राजस्थान/ 19 जून को होंगे राज्यसभा चुनाव, तीन सीटों के लिए 4 प्रत्याशी; सरल भाषा में जानें वोटों का गणित

संजीवनी टुडे 01-06-2020 21:56:52

कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के मद्देनजर राजस्थान में स्थगित किए गए राज्यसभा चुनाव की नई तारीख का निर्वाचन आयोग ने सोमवार को ऐलान कर दिया है। राजस्थान से राज्यसभा की रिक्त हुई तीन सीटों पर चुनाव अब 19 जून को होंगे।


जयपुर। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के मद्देनजर राजस्थान में स्थगित किए गए राज्यसभा चुनाव की नई तारीख का निर्वाचन आयोग ने सोमवार को ऐलान कर दिया है। राजस्थान से राज्यसभा की रिक्त हुई तीन सीटों पर चुनाव अब 19 जून को होंगे। 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने सोमवार को बताया कि राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव 26 मार्च को करवाए जाने थे। कोरोना संकट के चलते चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। ये चुनाव अब 19 जून को होंगे। 

प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस से पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी हैं तो भारतीय जनता पार्टी की ओर से राजेंद्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत को मैदान में उतारा गया था। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 6 मार्च को शुरू हुई थी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 मार्च थी 16 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच हुई थी। राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवारों की ओर से नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। जांच में सभी नामांकन पत्र सही मिले थे। ओंकार सिंह लखावत का पर्चा वापस नहीं लेने के चलते 26 मार्च को तीन सीटों पर मतदान तय था, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव स्थगित कर दिए थे। 

कुछ ऐसा है वोटों का गणित
प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के वोट हैं। प्रदेश की इन तीनों सीटों में से एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास 107 विधायकों के वोट हैं तो भाजपा के पास 72 विधायकों के वोट हैं। कांग्रेस के पास 13 निर्दलीयों में से अधिकतर का समर्थन भी है। अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की संख्या 21 है। तय फॉर्मूले के अनुसार कांग्रेस को 2 सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं। भाजपा के पास सदन में 72 विधायक हैं। ऐसे में प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए। लिहाजा, बड़ा उलटफेर नहीं होने की स्थिति में भाजपा के खाते में भी एक सीट आना तय है। भाजपा ने ओंकार सिंह लखावत का पर्चा वापस नहीं लेकर मतदान कराने की स्थिति पैदा कर दी।

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