संजीवनी टुडे

बगैर अनुमति के किसी भी पार्टी-प्रत्याशी के पोस्टर पंपलेट न छापें प्रिंटिंग प्रैस : डा. शालीन

संजीवनी टुडे 19-03-2019 22:40:27


सोनीपत। किसी भी अधिकृत (रिकॉगनाईज) राजनैतिक दल या प्रत्याशी को अनुमति नहीं मिलती तब तक वह कोई भी प्रचार-प्रचार नहीं कर सकते। यही नहीं पार्टी या प्रत्याशी तब तक किसी को कोई प्रचार-प्रचार करने की अनुमति नहीं दे सकता। अगर कोई भी ऐसा करता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 171एच के तहत मुकद्दमा दर्ज किया जा सकता है। कोई भी प्रिंटिंग प्रैस संचालक भी बगैर अनुमति के किसी पार्टी या प्रत्याशी के चुनावी पंफलेट, पोस्टर, फ्लैक्स या अन्य चुनाव प्रचार सामग्री न छापें। डा. शालीन मंगलवार को जिला के सभी प्रिंटिंग प्रैस संचालकों की मीटिंग को संबोधित कर रहे थे। उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डा. शालीन मंगलवार को जिला के सभी प्रिंटिंग प्रैस संचालकों की मीटिंग को संबोधित कर रहे थे। 

डाॅ. शालीन ने कहा कि चुनावी पंपलेटस व पोस्टर आदि छपवाने के संबंध मेें जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 127 ए के प्रावधानों के अनुसार प्रकाशक व मुद्रक के नाम, पता, प्रतियों की संख्या के बिना प्रचार सामग्री नहीं छपवाई जा सकती। आदेशों में कहा गया है कि प्रकाशक को न केवल अपनी पहचान देनी होगी बल्कि हस्ताक्षर के साथ उन दो लोगों से सत्यापन (गवाही) भी कराना होगा जो उसे व्यक्तिगत रूप से जानते हो। अगर पम्पलेट अथवा पोस्टर राज्य की राजधानी में छापा जाता है तो मुद्रक को एक तर्क संगत समय में छापे गये कागजात की प्रति मुख्य चुनाव अधिकारी को भेजनी होगी। यदि जिला में छपाई की जाती है तो उस स्थिति में कागजात की प्रति जिला मैजिस्ट्रेट को प्रेषित करनी होगी। उन्होंने कहा कि चुनाव पम्पलेट व पोस्टर का अर्थ वह प्रकाशित पम्पलेट, हैंडबिल या अन्य कागजात है, जो प्रत्याशी अथवा प्रत्याशियों के समूह को प्रोत्साहित करने के लिए वितरित किया जाता है। प्रिंटिंग प्रैस द्वारा इन आदेशों की उल्लंघना करने पर आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी। 
समर्थक को प्रचार करने के लिए भी लेनी होगी अनुमति
जिला निर्वाचन अधिकारी डाॅ. शालीन ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की हिदायतों के अनुसार कोई भी व्यक्ति अथवा राजनैतिक दल या उम्मीदवार 10 रुपये से ज्यादा का खर्च करता है तो वह प्रचार होता है। ऐसे में प्रचार करने वाले संबंधित व्यक्ति को 10 दिन के अंदर उस दल अथवा प्रत्याशी से लिखित अनुमति लेनी होगी। यही नहीं अनुमति के 48 घंटे के अंदर इसे जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में जमा करवाना होगा। अगर कोई भी इन आदेशों का उलंघन करता है तो धारा 171एच के तहत संबंधित पर एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इस दायरे में वह सभी आदमी भी आते हैं जो अपने घरों के उपर प्रचार सामग्री लगाते हैं। प्राईवेट प्रापर्टी के उपर लगे पोस्टर व बैनर के लिए भी मालिक की लिखित अनुमति लेनी होगी। 

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मीटिंग में प्रिंटिंग प्रैस मालिकों को दी हिदायतें 
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त डाॅ. शालीन ने जिला में स्थापित सभी प्रिंटिंग प्रैस व प्रिंटरज मालिकों से कहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दल व चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार या उनके समर्थक भारी मात्रा में पोस्टर, पंपलेट, हैंड बिल बैनर इत्यादि छपवा कर जारी करेंगे। किंतु जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 125-क के अनुसार कोई भी प्रकाशक/प्रिंटर या प्रिंटिंग प्रैस का मालिक किसी भी प्रकार की गैर कानूनी सामग्री नहीं छाप सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे छपाई के कोई दस्तावेज किसी के धर्म, जाति, समाज, भाषा या चरित्र हनन का प्रकाशन हो वह गैर कानूनी होगा। दोषी पाए जाने पर प्रकाशन व छपवाई करवाकर ऐसी सामग्री जारी करने वाले के विरुद्घ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127ए के अनुसार कार्यवाही का प्रावधान है। छापी जाने वाली प्रचार सामग्री जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा गठित एमसीएमसी कमेटी द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।

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बगैर अनुमति के प्रसारण न करें केबल संचालक 
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डाॅ. शालीन ने बताया कि कोई भी केबल संचालक बगैर अनुमति के किसी भी तरह के राजनैतिक विज्ञापन, पट्टी न चलाएं। यही आदेश सिनेमा हाल संचालकों पर भी लागू रहेंगे। डाॅ. शालीन मंगलवार को जिला के सभी केबल संचालकों व सिनेमा हाल संचालकों की मीटिंग को संबोधित कर रहे थे। डाॅ. शालीन ने कहा कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह के विज्ञापन अथवा प्रचार हेतू एमसीएमसी कमेटी से अनुमति लेनी आवश्यक है। ऐसे में कोई केबल संचालक अथवा सिनेमा हाल संचालक अगर किसी भी तरह का विज्ञापन अथवा पट्टी चलाता है तो उसके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उलंघन का मामला दर्ज किया जाएगा।
 

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