संजीवनी टुडे

आंबेडकर ब्रिज पर गढ्डे बने जानलेवा , संबंधित विभाग इंतजार कर रहा बड़े हादसे का

संजीवनी टुडे 18-03-2019 22:01:38


कठुआ। आए दिन सरकार और जिला प्रशासन द्वारा शहर के विकास के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं और करोड़ों रुपये के फंड खर्चकर शहर को निखारा जाता है, लेकिन इसके बावजूद पूरे शहरवासियों के लिए पुल पर बने जानलेवा गढ्डे जी का जंजाल बने हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण कठुआ शहर के मुख्य कैप्टन सुनील चौधरी चौक के समीप बने आंबेडकर ब्रिज पर करीब एक साल से बड़े-बड़े गढ्डों को ठीक करने के लिए प्रशासन के पास या तो फंड की कमी है या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है। जबकि शहरवासियों ने कई बार इसे रिपेयर करने के लिए संबंधित विभाग से मांग भी कर चुके हैं, लेकिन विभाग के पास मात्र अश्वासन के अलावा ओर कुछ नहीं है। सच्चाई ये है कि आंबेडकर ब्रिज पर बने कई महीनों से बड़े-बड़े जानलेवा गढ्डे भरने के लिए कोई गंभीर नहीं है। 

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आलम ये है कि जब भी कोई वीवीआईपी मुवमेंट की कभी यहां से गुजरने की सूचना मिले तो विभाग मात्र गढ्डों को मिट्टी से भर कर अपनी कमजोरी छिपाने का प्रयास करता है गौरतलब हो कि 1998 में बने पुल पर आज तक लाइटें नहीं लगी हैं। रात के समय में अक्सर वहां आवारा पशुओं के कारण दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। कम से कम नव गठित नगर परिषद को ऐसी समस्याओं का तुरंत समाधान करना चाहिए।

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स्थानीय निवासी राजेश कुमार का कहना है कि पीडब्ल्यूडी विभाग के आला अधिकारी जितनी कमीशन ठेकेदारों से लेते हैं, अगर उसमें से कुछ पैसे लगाकर बड़े-बड़े गढ्डों को रिपेयर कर दें तो आम जनता को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा मगर फंड का रोना रोकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सड़क रिपेयर का काम पीडब्ल्यूडी विभाग का है और अगर वह इसे पूरा करने में असमर्थ हैं तो जिला प्रशासन को पीडब्ल्यूडी विभाग के सभी अधिकारियों का वेतन रोकना चाहिए। लेकिन एेसा होता नहीं है, इसके लिए आम लोगों को ही सड़कों पर आना पड़ता है और तब जाकर प्रशासन की भी नींद खुलती है।

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