संजीवनी टुडे

उत्तराखंड के सैन्य परिवारों पर राजनीतिक दलों की निगाह

संजीवनी टुडे 07-03-2019 14:55:05


देहरादून। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तराखंड के सैनिकों और उनके परिवारों को राजनीतिक दल लुभाने की कोशिश में लगे हुए हैं। प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों में सैनिकों के वोट काफी प्रभावकारी हैं। कई सीटों पर तो सैनिकों के वोटों से हार-जीत तय होती है। इसलिए सभी राजनीतिक दल अभी से सैनिकों को प्रभावित करने की जुगत में लग गए हैं। 

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उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों में अल्मोड़ा, गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में हार जीत काफी हद तक सैनिकों के वोटों पर निर्भर होती है। कर्नल सीएम नौटियाल का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ही बस सैनिकों के बारे में सोचती है। 

नौटियाल ने बताया कि उत्तराखंड सैनिक बहुल क्षेत्र है और 60 से 80 फीसदी सैनिक राष्ट्रवादी भाजपा के साथ हैं। यह कितना दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के 70 वर्षों तक सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन की अव्यवस्था दूर नहीं की जा सकी। इस काम को वर्तमान सत्तारूढ दल भाजपा ने ही किया है। छोटी-मोटी विसंगतियां छोड़ दी जाएं तो आज सैनिकों की काफी समस्याएं सुलझ चुकी हैं। 

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कर्नल नौटियाल बताया कि पहले सैनिकों के मूल वेतन का 75 फीसदी रकम पेंशन के रूप में मिलता था। बाद में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में मूल वेतन का 50 प्रतिशत कर दिया गया, जिसके कारण काफी विसंगतियां आ गई थी लेकिन वन रैंक वन पेंशन व्यवस्था लागू होने से समस्याओं का काफी समाधान हो गया है। उन्होंने कहा कि काफी हद तक सैनिक और सैनिक परिवार राष्ट्रवादी दलों के साथ जुड़ा हुआ है। इसका कारण सैनिक परिवार और सरकार की भावनाओं का एक जैसा होना है। 

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