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लॉक डाउन में निखर उठी गृहणियों की पॉक कला

संजीवनी टुडे 03-06-2020 15:03:53

भारत की संस्कृति बहुआयामी है तो व्यंजन भी विविध हैं। दुनिया भर में भारतीय व्यंजनों पर शोध चल रहा है।


गाजीपुर। भारत की संस्कृति बहुआयामी है तो व्यंजन भी विविध हैं। दुनिया भर में भारतीय व्यंजनों पर शोध चल रहा है। इस कोरोना महामारी में अमेरिका के एक शोध में इम्यूनिटी बढ़ाने में सबसे ज्यादा कारगर 'भात(चावल) और दाल' को बताया गया है। 

ऐसे में कोरोना ने जहां आर्थिक हालात को प्रभावित किया है, वहीं पर्यावरण को शुद्ध तथा स्वालम्बन की ओर बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। विश्व के कई देशों के साथ जब भारत में कोरोना वायरस के कारण पूर्णबंदी हुई तो विविध व चटख खाने के पंसदीदा लोगों पर खासा प्रभाव पड़ा। क्योंकि सड़क के किनारे चॉट-चाउमीन व फुलकी के लगे ठेले, होटल, रेस्टोरेंट सब बंद हो गए। 

गौरतलब है कि लॉकडाउन के पहले पुरूषों के साथ महिलाओं की विविध व्यंजन खाने की जो आदत बाहर पड़ गई थी, वह काफी प्रभावित हुआ। महिलाओं ने पुन: विविध व्यंजन बनाने का एक बार फिर बीड़ा उठाया और पॉक कला को निखार डाला। लगभग 2 महीने से अधिक समय तक बंद रहे बाजारों के दौरान घरों में ताक झांक के बाद एक बात खुलकर सामने आई कि लॉक डाउन के दौरान गृहणियों के पाक कला में काफी निखार आ गया है। 

खास बात यह कि इस दौरान घरों की बहुओं व बच्चों ने आधुनिक व्यंजनों पर अपने हाथ आजमाए तो वहीं घरों की बुजुर्ग माताएं जो रसोई से काफी दूर हो चुकी थी। उन्होंने गांवों में चलने वाली पारंपरिक देशी मिठाइयां लड्डू, लक्ठा, बर्फी, पेड़ा, इमरती व चना दाल की नमकीन बनाकर अपने हुनर का लोहा मनवाया।

गृहणियों ने बताया कि लॉकडाउन में सोशल मीडिया खासकर यूट्यूब ने काफी मदद किया। सबसे बड़ी बात यह थी घर की नई पीढ़ी ने आधुनिक व्यंजनों पर जहां अपने हाथ आजमाएं, वहीं मिठाई की दुकानें बन्द होने से बुजुर्ग माताओं ने भी पारंपरिक व्यंजन ख़ासकर लक्ठा, बर्फी, पेड़ा, गुड़ जलेबी व दाल नमकीन इत्यादि बनाकर अपनी रसोई की हुनर का लोहा मनवाया। 

नगर के प्रकाश नगर कॉलोनी निवासी मीरा सिंह, कचहरी क्षेत्र निवासी सुनीता गुप्ता, विवेकानंद कालोनी विभा राय व जलनिगम कालोनी निवासी वंदना अग्रवाल ने कहाकि लॉक डाउन के शुरुआती समय में कुछ दिन बच्चे शांत रहें। लेकिन महज एक हफ्ते के बाद ही बच्चों और स्वयं अपना भी चटखारे व्यंजनों के प्रति प्रेम उमड़ने लगा। बाजारों में दुकानें बंद थी ऐसे में घर की रसोई ही मुख्य साधन बनी। आम दिनों में सामान्य तौर पर चाऊमीन, मैगी व पकौड़ी घरों पर बन जाते रहे लेकिन मसाला डोसा, छोले भटूरे, फ्रेंच फ्राइज, पनीर टिक्का, बर्गर, पिज़्ज़ा जैसे तमाम व्यंजन रसोई के प्रयोग से बाहर नजर आने लगे। लेकिन स्वाद जो न कराए, हालांकि इस कार्य में सबसे अधिक मदद सोशल मीडिया खासकर यूट्यूब ने किया। जिसकी मदद से धीरे-धीरे सभी पकवान घरों में ही उपलब्ध होने लगे।

इस संबंध में परिवार के मुखिया जितेंद्र सिंह, संजीव गुप्ता, अजय राय, सिद्धार्थशंकर इत्यादि ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान गृहिणियों के पाक कला खुलकर सामने आ गए। हालांकि मुख्य भोजन के अतिरिक्त रसोई में इन व्यंजनों का चलन बहुत अच्छा तो नहीं माना जाता, लेकिन एक चीज से संतोष करना पड़ा इन व्यंजनों के घरों में बनने से कम से कम इन के शुद्धता की पूरी गारंटी बनी हुई है। घर के शुद्ध सामानों से बने यह व्यंजन भले ही विदेशी हो, लेकिन इनमें देसी स्वाद आने लगा। 

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