संजीवनी टुडे

मिर्जापुर मंडल में पॉक्सो अधिनियम में तीन को मिली आजीवन कारावास की सजा

संजीवनी टुडे 12-07-2019 15:58:01

मिर्जापुर मंडल में पॉक्सो अधिनियम में तीन को मिली आजीवन कारावास की सजा


भदोही। सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नाबालिग बच्चों और किशोरों के प्रति यौन अपराध को लेकर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए पुलिस को निर्देश दिये हैं। सरकार के कड़े रुख की वजह से राज्य की पुलिस पॉक्सो एक्ट के आरापितों को सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मिर्जापुर पुलिस परिक्षेत्र में 18 माह में पॉक्सो अधिनियम में निरुद्ध 25 आरोपितों को अदालत से सजा दिलायी जा चुकी है। इसमें तीन को आजीवन कारावास की सजा मिली है। सबसे अधिकमामले सोनभद्र में  दर्ज हुए हैं। 

मिर्जापुर पुलिस परिक्षेत्र के डीआईजी पीयूष श्रीवास्तव के कार्यालय के मुताबिक मिर्जापुर मंडल के तीनों जिलों मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही की पुलिस महिलाओं, नाबालिग और किशोरों के प्रति यौनिक अपराध को लेकर काफी गंभीर और सख्त है। विंध्याचल पुलिस परिक्षेत्र में पहली जनवरी 2018 से 09 जुलाई 2019 तक 25 मामलों में अदालत से सजा दिलवाई गई । संबंधित मुकदमों की प्रभावी पैरवी कर जिलों की पुलिस आरोपितों को सजा दिलवाने में बेहद कामयाब रही है। 

डीआईजी पीयूष श्रीवास्तव के अनुसार नाबालिग बच्चों के साथ अपराध करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। मिर्जापुर में 5, भदोही में 7 और सोनभद्र में सबसे अधिक 13 लोगों के खिलाफ नाबालिगों के साथ यौन अपराध करने पर पॉक्सो अधिनियम में अदालत से सजा मिलने के बाद पुलिस ने जेल भेजा। वहीं तीनों जिलों में तीन को आजीवन कारावास की सजा मिली है। 

पुलिस आंकड़ों के अनुसार मिर्जापुर में जिन पांच मामलों में सजा दिलाई गई है उसमें एक आरोपित को आजीवन कारावास की सजा दिलायी गयी है जबकि चार अन्य को दस, पांच, सात वर्ष की सजा मिली है। भदोही में आजीवन कारावास की सजा एक को मिली है। इसके इतर छह आरोपितों को अदालत ने दस, सात और तीन साल की सजा का दंड़ दिया है। सभी को जेल भेज दिया गया है। 

मंडल में सबसे अधिक नाबालिग यौनिक अपराध के मामले सोनभद्र जिले से हैं। यहां जिन तेरह लोगों को अदालत से पॉक्सो अधिनियम के तहत जेल मिली है उसमें आजीवन कारावास एक को मिला है जबकि बारह आरोपियों को अदालत से बारह, दस, पांच, तीन साल का कारावास दिया गया है। 

डीजाईजी पीयूष श्रीवास्त ने मंडल के सभी जिलों की पुलिस को साफ निर्देश दिया है कि इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाय। बच्चों और महिलाओं के प्रति यौनिक अपराध को रोकने के लिए अदालतों में चल रहे पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमों की पैरवी कर आरोपितों को सजा दिलाई जाए, जिसकी वजह से इस तरह के यौन अपराध पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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