संजीवनी टुडे

जिले में खेल मैदान बदहाल, अभ्यास के दौरान चोटिल हो रहे खिलाड़ी

संजीवनी टुडे 23-11-2018 12:55:04


हरदा। खेल एक ऐसी विधा है, जिसमें सुविधाओं का होना लाजमी माना गया है। वर्तमान समय में ग्रामीण अंचल में विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभाओं का जौहर दिखा चुके हैं। किसी भी खिलाड़ी का प्रारंभिक दौर विद्यालय और महाविद्यालय माना गया है, क्योंकि यही वे स्थान हैं, जहां पर विद्यार्थी का खेल से विधिवत नाता जुड़ता है, लेकिन जिले के अनेक स्थानों पर खेल के मैदान की अपनी दूर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। तहसील में खेल मैदान बदहाल हैं।

ऊबड़-खाबड़ पथरीले मैदानों पर खिलाड़ी अभ्यास के दौरान चोटिल हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार बागरूल के दिव्यंाग छात्रावास के सामने खेल के मैदान की हालत इतनी दयनीय है कि आम व्यक्ति उस पर से नंगे पैर निकलता है, तो पैर छलनी हो जाते हैं, तो फिर दिव्यंाग बच्चों के हाल उक्त मैदान पर खेलना कहां तक सार्थक होगा। इस मैदान में जगह-जगह छोटे-बड़े पत्थर फैले पड़े हैं। वहीं कांटे वाले छोटे-छोटे पौधे जगह-जगह उग आए हैं। 

इस संदर्भ में जब शिक्षकों से राय जाननी चाही तो उन्होंने बताया कि हमारे द्वारा शिक्षा विभाग को अनेक बार लिखित में अवगर कराया जा चुका है। लेकिन सार्थक उत्तर आज तक अप्राप्त है। खेल जानकारों और पूर्व खिलाडिय़ों की माने तो खेल मैदानों पर घास एवं मैदान का उचित रखरखाव किया जाना चाहिए। जिससे की खिलाडिय़ो को अभ्यास के दौरान अनेक समस्याओं से सामना करना पड़ता है जिससे अभ्यास को सुचारू रूप से नहीं कर पाते हैं।

जिले के अंतर्गत टिमरनी, खिरकिया, हंडिया, रहटगांव में आज भी खिलाडिय़ों के लिए सर्वसुविधायुक्त खेल मैदान नहीं होने से कई बच्चे अपनी प्रतिभाओं को दबाएं बैठे हैं, जिस कारण से उनके अरमानों पर पानी फिर रहा है। जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान के सामने कन्या छात्रावास एवं शिक्षकों के भवन बनाया बनाए गए हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा आज तक पूर्ण न करने से उक्त भवन में न कन्या छात्रावास संचालित हो रहा है और न ही शिक्षकों के भवन का निर्माण पूर्ण है। इस कारण से शिक्षकों को अप-डाउन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसी वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैयार कराये गये खेल मैदान भी अधूरे साबित हो रहे है। सूत्रों की मानें तो खेल मैदान में सबसे पहले समतलीकरण और बाद में घास का होना अत्यंत आवश्यक है। मैदान में निश्चित दिन सिंचाई की जानी चाहिए। जिले में एक भी खेल मैदान ऐसा नहीं है, जहां पर अच्छी किस्म की घास और पानी की सिंचाई की जाती हो। यहां तक कि जिला मुख्यालय स्थित दिव्यंागों के लिए छात्रावास के सामने इकलौता खेल मैदान विभिन्न सुविधाओं से महरूम है। इस मैदान में घास कम और बजरी ज्यादा दिखाई देती है। जिससे नन्हें दिव्यंाग खिलाड़ी आये दिन चोटिल होते रहते हैं। जिले को सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम की दरकार तो है, लेकिन मैदान का पूर्ण निर्माण अब तक नहीं हो सका है।

जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान भवन में तत्कालीन कलेक्टर श्रीकांत भनोट के आदेश पर दिव्यंाग छात्रावास को संचालित करने का आदेश जारी किया गया था, किन्तु आज भवन के सामने मैदान की शक्ल अभी भी जस की तस है। इस ऊबड़-खाबड़ मैदान में लोक निर्माण विभाग द्वारा समतलीकरण तो किया गया लेकिन मैदान अब भी समतल नहीं हो सका है।

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इस मामले में जब हिन्दुस्थान समाचार द्वारा जिला शिक्षा केंद्र अधिकारी डॉ. आरएस तिवारी से बात की गई है तो उनका था कि आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। अभी आदर्श आचार संहिता चल रही है। तत्पश्चात जिला कलेक्टर द्वारा ग्राउंड का जीर्णोद्धार कराया जाएगा।

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