संजीवनी टुडे

एकता और अखण्डता की भावना जागृत करने वाले कार्यक्रमों का आयोजन महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री

संजीवनी टुडे 14-01-2019 15:57:00


शिमला। भारत जैसे विविध संस्कृति वालेर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना महत्वपूर्ण है जो युवाओं के दिल और दिमाग में एकता की भावना को उद्वृत करने में मदद करते हैं। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां पूर्वोत्तर राज्यों के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(एबीवीपी) के छात्रों के साथ बातचीत के दौरान कही, जो विद्यार्थी अनुभव के तहत इंटर स्टेट लिविंग कार्यक्रम में राज्य के दौरे पर हैं।सात पूर्वोत्तर राज्यों के इकतीस विद्यार्थी इस दौरे में का हिस्सा हैं, जिसमें 16 लड़कियां शामिल हैं।

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राज्य में छात्रों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटरस्टेट लिविंग में छात्र अनुभव कार्यक्रम एबीवीपी की पहल है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों में भाईचारे की भावना पैदा करना है। जय राम ठाकुर ने कहा कि सात राज्यों की मौजूदगी के कारण पूर्वोत्तर भारत को ’सात बहनों की भूमि’ भी कहा जाता है, जो विभिन्न मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हुए 166 से अधिक जनजातियों का निवास स्थान था। उन्होंने कहा कि देश का पूर्वोत्तर क्षेत्र वास्तव में हमारे महान राष्ट्र के लोकाचार का प्रतिनिधित्व करता है। 

उन्होंने कहा कि एक अंतर्क्षेत्र होने के नाते आमतौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों और उनके परिवारों को पहुंच की कमी का अनुभव होता है जिसकी पूर्ति इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों से होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र विभिन्न राज्यों की संस्कृति, खान-पान और विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जिन राज्यों का वे दौरा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरे का एक हिस्सा यह ‘एहसास’ करवाता है कि विविधता में भी हम आत्मा और दिल से एक हैं।

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उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने राज्यों में एबीवीपी संगठन को अधिक से अधिक सुदृढ़ कर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करें। इंटर स्टेट लिविंग प्रोग्राम में छात्र अनुभव के अध्यक्ष अतुल कुलकर्णी ने कहा कि एबीवीपी द्वारा इंटरस्टेट लिविंग के तहत छात्र अनुभव कार्यक्रम 50 साल पहले शुरू किया गया था जब अरुणाचल प्रदेश के कुछ छात्र अपनी पढ़ाई के लिए मुंबई आए थे, और उन्हें एक स्थानीय परिवार द्वारा अपनाया गया था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये छात्र अपने घर लौटने से पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें। 

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