संजीवनी टुडे

कानपुर के बदले सियासी मिजाज को चौथी बार भी भेद नहीं सका विपक्ष

संजीवनी टुडे 24-05-2019 18:15:26


कानपुर। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने कानपुर के बुद्धा पार्क में रैली की थी। जिसके बाद से कानपुर का ऐसा सियासी मिजाज बदला जो आज भी बरकरार है। यही नहीं प्रधानमंत्री के दौरान भी दो बार कानपुर आकर नरेन्द्र मोदी ने इस सियासी मिजाज को बढ़ाने का ही काम किया है। बुद्धा पार्क रैली से अब तक कानपुर में दो लोकसभा और एक विधानसभा व महानगर के चुनाव हुये। जिसमें सभी में भाजपा को भारी जीत दर्ज हुई और विपक्ष इस सियासी मिजाज को नहीं भेद सका जिसके लिए अब विपक्ष को इस पर विशेष मंथन करना होगा। भारतीय जनता पार्टी को कानपुर में पहली जीत विधायकी के रूप में मिली और गोविन्द नगर सीट से बालचन्द्र मिश्रा 1989 में उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पहुंचने में सफल रहे। इसके बाद 1991 में राम मंदिर आंदोलन की चली लहर से जगतवीर सिंह द्रोण कानपुर नगर लोकसभा सीट से पार्टी को पहली जीत दी। फिर क्या था लोकसभा और विधानसभा में भाजपा कानपुर का गढ़ बनता चला गया। 

द्रोण लगातार तीन बार सांसद रहे और इसके बाद प्रदेश में क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व बढ़ने लगा पर शहरी क्षेत्र में इनका असर बेअसर रहा। वहीं भाजपा की कमजोर स्थिति का फायदा 1999 में कांग्रेस के पूर्व महापौर श्री प्रकाश जायसवाल ने उठाया और पहली बार कानपुर सीट से सांसद बने। इसके बाद वह लगातार तीन बार बहुत कम अंतराल से भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त देते रहे और अपनी छवि लोकप्रिय नेता के रुप में बना ली। इसी को देखते हुए यूपीए वन और यूपीए टू में केन्द्रीय मंत्री बन सके। लेकिन जब 19 अक्टूबर 2013 को कानपुर के बुद्धा पार्क से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विजय शंखनाद रैली का आगाज किया और कानपुरवासियों को आत्मीयता के साथ जोड़ा तो श्री प्रकाश जायसवाल की बुरी हार हुई। भाजपा के प्रत्याशी डा. मुरली मनोहर जोशी ने दो लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद से कानपुर का सियासी मिजाज ऐसा बदला कि कोई सोच भी नहीं सकता था कि राम मंदिर आंदोलन से बड़ी सफलता मिलती चली जाएगी। जबकि उस समय उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी और जनपद की 10 विधानसभाओं में पांच सीटे सत्ताधारी पार्टी के पास रहीं। 

इसके बावजूद 19 अक्टूबर 2013 को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के उम्मीदार नरेन्द्र मोदी ने बुद्धा पार्क में जो ऐतिहासिक रैली की उससे कानपुर और आस-पास के जनपदों का सियासी मिजाज बदल गया और यह क्रम आज भी बरकरार है। जिसके चलते पहले 16वीं लोकसभा में कानपुर की दोनों सीटें, महानगर के चुनाव में और विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी जीत दर्ज हुई। इसके बाद 17वीं लोकसभा में भी मोदी का मैजिक जनता के बीच खूब चढ़कर बोला और एक बार फिर कानपुर की दोनों सीटें कल आये चुनाव परिणाम में भाजपा की झोली में आ गयीं। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद दो बार नरेन्द्र मोदी बीच में कानपुर आये और इस सियासी मिजाज को अपने जोरदार संबोधन से कमजोर नहीं होने दिया। ऐसे में अब विपक्ष को कानपुर के बदले सियासी मिजाज को अपने पाले में करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। 

प्लीज सब्सक्राइब यूट्यूब चैनल

उम्मीदवारों को मतदाताओं ने नहीं दी तरहीज 
मोदी का मैजिक कानपुर में ऐसा चला कि भाजपा उम्मीदवारों को तरहीज नहीं दी और झूमकर कमल का बटन दबाया। जिसके चलते कानपुर नगर सीट से सत्यदेव पचौरी और अकबरपुर सीट से सिटिंग सांसद देवेन्द्र सिंह भोले की भारी जीत हुई। जबकि दोनों विपक्षी उम्मीदवारों की अपेक्षा कम लोकप्रिय थे। लेकिन मोदी मैजिक के सामने दोनों दिल्ली पहुंचने में सफल रहे और विपक्ष के उम्मीदवार पार्टी के चलते उन्हे हार का सामना करना पड़ा।

मात्र 240000/- में टोंक रोड जयपुर में प्लॉट 9314166166

More From state

Trending Now
Recommended