संजीवनी टुडे

हिन्दू दोस्त की मौत पर मुस्लिम ने पूरे हिन्दू विधान से किया कर्मकांड

संजीवनी टुडे 29-05-2020 16:20:01

समाज से भाईचारा और दोस्ताना अभी तक ख़त्म नहीं हुआ है। इसका एक जीवंत उदाहरण मांगरोल तालुका के वांकल गांव में देखा गया।


अहमदाबाद। समाज से भाईचारा और दोस्ताना अभी तक ख़त्म नहीं हुआ है। इसका एक जीवंत उदाहरण मांगरोल तालुका के वांकल गांव में देखा गया। एक मुस्लिम ने बुरे दिनों में हिन्दू दोस्त को न केवल सहारा दिया बल्कि मरने पर उसका हिन्दू रीति रिवाज से न केवल अंतिम संस्कार किया बल्कि बाहरवें और तेहरवें दिन के पूरे हिन्दू विधान से कर्मकांड भी किया।

भरूच के भराडिया गांव संपन्न प्रफुल्भाई पटेल का पूरा परिवार कालचक्र में फंस गया। कुदरत के कोप से पहले प्रफुल्भाई के माता-पिता का देहांत हुआ। बाद में भाई चल बसा। फिर उसकी पत्नी भी चल बसीं। उनका घर संसार टूट गया। समय की मार से खानदानी 300 बीघा जमीन और पुश्तैनी मकान भी बिक गया। उनकी एक बेटी भी थी। एक दिन बेटी की शादी कर उसे भी ससुराल विदा कर दिया। इसके बाद प्रफुल्भाई की आर्थिक स्थिति और खराब हो गयी। ऐसे में वांकल गांव के मुस्लिम मित्र शब्बीरभाई शाह ने उनकी मदद की और प्रफुल्भाई को अपने साथ अपने घर ले गया और उन्हें घर के सदस्य की तरह रखा। 

शब्बीर ने प्रफुल्भाई को अपने घर में करीब 18 साल तक अपना बनाकर रखा। पिछले दिनों प्रफुल्भाई के निधन होने पर शब्बीर ने उनके रिश्तेदारों की राह न देखते हुए उनका हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया। गुरुवार को शब्बीर ने प्रफुल्भाई की बारवें और शुक्रवार को तेरवें दिन के कर्मकांड पूरी हिन्दू विधि के अनुसार पूरी की और लाडू का भोजन भी लोगों को करवाया। यह सब देख कर एक पंक्ति याद आती है कि दोस्ती यारी में किसी की जात नहीं देखी जाती है, दोस्ती तो बस दोस्ती है, उसमें तेरा मेरा नहीं बस दोस्ती निभायी जाती है।

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