संजीवनी टुडे

जरूरतमंदों की आंखो के नूर बने हैं बांदा के भाजपा सदर विधायक

संजीवनी टुडे 14-05-2020 15:37:43

चित्रकूट धाम मंडल मुख्यालय में भले ही कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 21 पहुंच गई हो, जिससे आम जनमानस में दहशत भरा माहौल हो,


बांदा। चित्रकूट धाम मंडल मुख्यालय में भले ही कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 21 पहुंच गई हो, जिससे  आम जनमानस में दहशत भरा माहौल हो, लेकिन शारिरिक दूरी का पालन करते हुए जरूरतमंदों की मदद करते हुए 50 दिन बाद भी सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी का हौसला कम नहीं हुआ। वह और उनकी टीम जरूरतमंदों की मदद करने में कदम से कदम बढ़ाएं चले जा रहे हैं।

बांदा सदर विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के सभी मोहल्लों में राशन किट, मास्क, हैंड वास और जरूरत के सभी सामान वितरित कर रहे हैं।उन्होंने बकायदा अपने घर में पहले तो प्रतिदिन 500 लंच पैकेट बनवा कर वितरित कराया और इसके बाद राशन किट वितरण शुरू किया जो 50 दिन बाद भी निरंतर चल रहा है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी घर की चूल्हे की आग ठंडी नहीं पड़ी। कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोया। इतना ही नहीं उनके कैंप कार्यालय में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच जाते हैं और वहां से भी वह निराश नहीं लौटते।यही वजह है कि आज वह सभी जरूरतमंदों के आंखो के नूर बने हुए हैं। जनपद में अन्य कोई जनप्रतिनिधि उनके मुकाबले में टिकता नहीं दिखाई पड़ता है।

हजारों लोगों को भूख मिटाने वाले जन-नायक प्रकाश द्विवेदी
गांव-गांव में जो छोटे घर हैं, दलित बस्तियां हैं, जिनके पास रोज कमाने की चिन्ता होती थी। वो अपने घरों में कैद हैं। रोटी-रोजगार सब बन्द हैं तो पेट भरे भी तो कैसे? ये चिन्ता वाजिब थी। कुछ ऐसी ही चिन्ता शहरों और कस्बों की भी है। वहां भी रोजाना कमाने खाने वालों का अम्बार है और उनके लिए ये लाॅकडाउन ज्यादा बड़ी मुसीबत लेकर आया है। पर कहते हैं कि एक जनप्रतिनिधि जब जनता का सच्चा सेवक बने तो जनता भी उसे सर आंखों पर बैठा लेती है। 

तभी तो बाँदा सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी आज बाँदा की जनता की आंखों का नूर बने हुए हैं। जब ये देश इतना बड़ा हो, यहां की जनसंख्या इतनी बड़ी हो, जो पूरे विश्व का सातवां भाग हो तो फिर एक सरकार भी ऐसे संकट के समय सीमित मदद ही कर पाती है। लेकिन धन्य हो भारत की संस्कृति, धन्य हो यहां के लोग, वसुधैव कुटुम्बकम की भावना यहां तो कूट-कूट कर भरी हुई है। इसीलिए तो हम इस संकट की घड़ी में भी अन्य विकसित देशों की तुलना में मजबूती से खड़े हुए हैं,प्रकाश द्विवेदी इसी परम्परा के पोषक हैं।

असली शक्ति है, जनता की शक्ति
वो जानते हैं कि उनका विधायक बनना केवल संयोग नहीं है। वो कहते हैं, “कि ईश्वर ने मुझे सक्षम बनाया है, मुझे वो ताकत दी है, तो उस ताकत का प्रयोग करने की बुद्धि भी दी है। मैं उस ताकत, उस सक्षमता और उस बुद्धि का प्रयोग अपने क्षेत्र की जनता को खुशहाल रखने में करता हूँ। क्योंकि यही तो असली शक्ति है, जनता की शक्ति। यदि ये शक्ति सामथ्र्यवान बन पाई तो बुन्देलखण्ड और हमारा देश भी गौरवशाली इतिहास को दोहरायेगा।”

उनके काम करने का अंदाज
प्रकाश द्विवेदी एक दिन पहले ये लक्ष्य बनाते हैं कि अगले दिन उन्हें किस-किस गांव में जाना है। जहां पर राशन बांटने की जरूरत होती है तो वहां राशन और जहां भोजन बांटने की आवश्यकता है तो वहां गर्मागर्म भोजन के पैकेट गरीब, असहाय और जरूरतमंदों को बांटे जाते हैं। इसके अलावा प्रकाश द्विवेदी के निर्देश पर शहर में कम्युनिटी किचेन भी चलाया जा रहा है, जो हजारों लोगों को प्रतिदिन गर्म भोजन उपलब्ध करा पा रहा है। 

जनता ने राशन कार्ड न बनने की शिकायत की तो प्रकाश ने मोर्चा संभालते हुए लोगों के राशन कार्ड बनवाने की पहल की, ताकि सरकारी मदद को अविलम्ब लाभार्थी तक पहुंचे। इसके अलावा प्रकाश द्विवेदी रोजाना अपने यहां सोशल मीडिया और फोन से आने वाली शिकायतों व सुझावों पर भी ध्यान देते हैं, इसके लिए उन्होंने बाकायदा शहर और गांव में अलग-अलग एक-एक टीम गठित की हुई है, जो बिन्दुवार प्राथमिकताओं के आधार पर तय करती है, जिससे जनता के काम भी प्रकाश द्विवेदी इस लाॅकडाउन पीरियड में भी कर पा रहे हैं। बांदा की जनता भी अपने विधायक के इस रूख पर प्रसन्न है। ऐसा लगता है जैसे प्रकाश धीरे-धीरे पूरे बाँदा जनपद को अपना मुरीद बनाने में लग गये हैं।

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