संजीवनी टुडे

भाजपा के लिए आसान नहीं राह, कांग्रेस के लिए मिशन 25 नामुमकिन

संजीवनी टुडे 12-04-2019 18:53:02


जयपुर। 2014 के लोकसभा चुनाव में तरह प्रदेश की गलियों में मोदी-मोदी के नारे की गूंज तो नहीं है, लेकिन 2019 में भी मोदी फैक्टर का असर बरकरार है। मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बड़े- बड़े होर्डिंग्स- बैनर गांव-कस्बों में लगवा दिए हैं, लेकिन कांग्रेस अभी निचले स्तर के मतदाताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। हालत यह है कि भाजपा के लिए जहां 25 सीटों पर जीत को बरकरार रखने की चुनौती तो है, लेकिन कांग्रेस के लिए मिशन 25 को साकार करना किसी सपने से कम नहीं है। प्रदेश की आधी से अधिक सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है। इस कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केद्रीय मंत्री गजेंन्द्रसिंह, पीपी चौधरी, अर्जुनलाल मेघवाल और राज्यवर्धनसिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। 

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंतसिंह के झालावाड़ से चुनाव मैदान में होने के कारण उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। तीन बार सांसद रहे सिंह चौथी बार चुनाव मैदान में है जिनका मुकाबला कांग्रेस के प्रमोद शर्मा से है। प्रमोद शर्मा भाजपा से जुड़े हुए रहे लेकिन विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। हालांकि शर्मा दुष्यतसिंह के मुकाबले कमजोर उम्मीदवार है लेकिन अब यह देखना रोचक होगा कि दुष्यतसिंह चौथी बार चुनाव जीत पाते या नहीं। बीकानेर में केंद्रीय मंत्री व भाजपा के उम्मीदवार अर्जुनलाल मेघवाल सशक्त उम्मीदवार है लेकिन भाजपा में रहे देवीसिंह भार्टी ने जिस तरह उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इससे उनके लिए चुनावी जीतने की चुनौती कड़ी हो गई है।
कई सीटों पर रोचक मुकाबलाः पाली में केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी का मुकाबला पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ से है। चौधरी ने पिछली बार उनकी बहन को सीधे मुकाबले में मात दी थी। टिकट वितरण से पहले भाजपा के जाट, दलित राजपूत व ओबीसी नेता पीपी चौधरी को दोबारा मैदान में उतारने का विरोध कर रहे थे, लेकिन अब खुलकर कोई बगावत नहीं कर रहा है, पर भीतरघात का खतरा उन पर मंडरा रहा है। बद्रीराम जाखड़ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी माने जाते है और जाट व दलित वोट बैंक के आधार पर जीत हासिल करने का मंसूबे पाले हुए है। 

जालोर लोकसभा क्षेत्र में सांसद देवजी पटेल दूसरी बार भाजपा के उम्मीदवार है, जिनका सामना पूर्व विधायक कांग्रेस प्रत्याशी रतन देवासी से है। पटेल के दस साल में क्षेत्र में विकास नहीं करवाने से लोगों में नाराजगी है और पार्टी के कई नेता भी उनके साथ नहीं है। देवासी समाज रतन देवासी को इस बार सांसद बनाने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए है। बाड़मेर में पूर्व सांसद कांग्रेस के मानवेन्द्रसिंह के सामने भाजपा ने पूर्व विधायक कैलाश चौधरी को मैदान में उतारा है। राजपूत वोट बैंक के साथ मुस्लिम व दलित वोटर्स में खासा जनाधार होने की वजह से मानवेंन्द्रसिंह मजबूत स्थिति में है।

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भाजपा को सांसद कर्नल सोनाराम का टिकट काटने का नुकसान हो सकता है। जिन्होंने पिछली बार कांग्रेस से पाला बदलकर पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंतसिंह को कड़ी टक्कर दी थी तथा कांग्रेस के हरीश चौधरी को हार का सामना करना पड़ा था। उदयपुर में सांसद अुर्जनलाल मीणा का मुकाबला पूर्व सांसद कांग्रेस प्रत्याशी रघुवीर मीणा से है। इस आदिवासी क्षेत्र में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में आठ सीटों में छह पर जीत हासिल की थी। इस लिहाज से भाजपा लोकसभा चुनाव में भी जीत की उम्मीद पाले हुए है, लेकिन अभी कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राजसमंद में भाजपा के मौजूदा सांसद हरिओम सिंह राठौड़ के चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा से पार्टी को यहां मजबूत उम्मीदवार चुनने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी तथा पूर्व विधायक एवं जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी को चुनाव मैदान में उतारना पड़ा। उनके सामने कांग्रेस ने बुजुर्ग देवकीनंदन गुर्जर को मैदान में उतारा है।

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यहां दीया कुमारी को जीत हासिल करने के लिए मेहनत करनी पड़ रही है। जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धनसिंह की अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ है लेकिन उन्हें जाट वोटर्स की वजह से खिलाड़ी कृष्णा पूनिया से खासी चुनौती मिल रही है। अलवर में कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेन्द्रसिंह का स्वामी बालकनाथ से सीधा मुकाबला है और यहां जितेन्द्रसिंह की राह आसान नहीं है। टोंक सवाईमाधोपुर से सांसद सुखवीर सिंह जौनपुरिया दूसरी बार किस्मत आजमा रहे है जिनका सामना कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा से है। जौनपुरिया को पिछले चुनाव में बाहरी उम्मीदवार के रुप में काफी विरोध का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार यह बात सामने नहीं आ रही। 

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