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किसानों की तरक्की और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए लाया गया नया कृषि कानून : सांसद अरूण साव

संजीवनी टुडे 01-10-2020 13:04:46

नेहरू स्थित सांसद अरूण साव के बिलासपुर स्थित सरकारी निवास पर कृषि बिल को लेकर लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


रायपुर/ बिलासपुर। नेहरू स्थित सांसद अरूण साव के बिलासपुर स्थित सरकारी निवास पर कृषि बिल को लेकर लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सांसद ने किसान संगठनों के पदाधिकारियों और जिले के प्रगतिशील कृषकों के साथ चर्चा की । उन्होंने बिल के समर्थन में सारी बातों को सबके सामने रखा। सांसद ने कहा कि कुछ लोग किसानों की स्वतंत्रता को सहन नहीं कर पा रहे हैं। किसानों की तरक्की और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए लाया गया नया कृषि कानून उन्हें रास नहीं आ रहा है। विपक्षी यह समझ लें कि जब तक किसानों की तरक्की नहीं होगी, देश की तरक्की नहीं होगी। 

 नेहरू चौक स्थित सांसद निवास सह कार्यालय में आयोजित परिचर्चा में सांसद साव ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। अन्नदाता किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गलत नीतियों और दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी के कारण आजादी के इतने वर्षों बाद भी किसानों की स्थिति में किसी प्रकार का सुधार नहीं आया है। आज भी किसान शादी, गृह निर्माण, गंभीर बीमारियों के ईलाज समेत अपनी अन्य बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए जमीन बेचने को मजबूर है।
 
सांसद ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री  भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के किसान क्रेडिट योजना को छोड़कर आजादी के बाद अब तक किसानों की तरक्की के लिए कोई बड़ी योजना नहीं बनी। अब केन्द्र की मोदी सरकार ने किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के हित में नया कृषि कानून लाया है। यह कानून किसानों को आत्मनिर्भर और संबल प्रदान करने वाला है।नया कानून से किसानों को बंधनों और शोषण से आजादी मिलेगी। इससे एक तरफ जहां किसानों की आय दोगुनी होगी, वहीं रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उपज का वाजिब दाम मिलेगा। 

आजादी के पहले  देश में किसानों की उपज की खरीदी किस तरह होती थी, यह हम सभी जानते हैं। एक व्यक्ति पूरे गांव की उपज को अकेले खरीदता था। इसलिए उस गांव के सभी किसानों की निर्भरता उसी व्यक्ति पर होती थी। आजादी के बाद 1960-70 के दशक में किसानों पर वर्षों से हो रहे इस अत्याचार के खिलाफ वातावरण तैयार हुआ। फलस्वरूप 1971 में तात्कालिन सरकार ने कृषि मंडी अधिनियम लाया, लेकिन किसानों की स्थिति तब भी नहीं सुधरी। 1991 में आर्थिक व्यवस्था में सुधार व उदारीकरण की बातें हुईं, लेकिन नतीजा ज्यों का त्यों रहा। श्री साव ने कहा कि अब किसान “वन नेशन-वन मार्केट” के चलते अपनी मर्जी से अपनी उपज जहाँ चाहे वहां बेच सकते हैं। मंडी में ही उपज बेचने की बाध्यता नहीं होगी।
 
नया कानून से किसानों को मंडी टैक्स, परिवहन चार्ज समेत अनेक परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी। बिक्री के तीन दिनों के भीतर उपज का वाजिब दाम भी मिल जाएगा। साव ने नए कृषि कानून को लेकर मचे सियासी बवाल का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग किसानों की स्वतंत्रता को सहन नहीं कर पा रहे हैं। उनके लिए काला धन कमाने का एक और रास्ता बंद हो गया है।इस अवसर पर दूर - दूर से आये किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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