संजीवनी टुडे

प्रयागराज में मकर संक्रांति पर करीब 80 लाख श्रद्धालु करेंगे स्नान

संजीवनी टुडे 14-01-2020 13:41:41

तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर माघ मेले के दूसरे बड़े स्नान पर्व मकर संक्रांति पर करीब 80 लाख लोगों के पुण्य की कामना के साथ स्नान करने की संभावना है।


प्रयागराज। तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर माघ मेले के दूसरे बड़े स्नान पर्व “मकर संक्रांति” पर करीब 80 लाख लोगों के पुण्य की कामना के साथ स्नान करने की संभावना है। 

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मंडलायुक्त आशीष कुमार गोयल और जिलाधिकारी भानुचन्द्र गोस्वामी ने आधी-अधूरी तैयारी के बीच पहले पौष पूर्णिमा स्नान के बाद मकर संक्रांति स्नान के दूसरे स्नान से पहले बचे कार्यों को पूरा करने का अधिकारियों को पूरा करने का निर्देश दिया था। काम पूरा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जायगी की हिदायत दी गयी थी।

मेला प्रशासन ने मकर संक्रांति के अवसर पर त्रिवेणी में करीब 80 लाख श्रद्धालुओं के पुण्य की कामना के साथ आस्था की डुबकी लगाने की संभावना व्यक्त की है । उनका कहना है कि पहले पौष पूर्णिमा स्नान पर अधिक श्रद्धालु नहीं पहुंच सके थे लेकिन मकर संक्रांति के अवसर पर भीड़ बढ़ने की संभावना है।

स्नान, दान और ध्यान पर्व मकर संक्रांति पर बुधवार को मकर संक्रांति का स्नान के बाद स्नानार्थी तिल, खिचड़ी, द्रव्य आदि का दान करेंगे। दान के साथ भगवान भाष्कर का पूजन अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की जायेगी। इस अवसर पर संक्रांति पर सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास भी समाप्त हो जायेगा और शुभ कार्यों की शुरूआत होगी।

देवरहा बाबा आश्रम प्रयाग पीठ के आचार्य रामेश्वर प्रपन्नाचार्य शास्त्री ने बताया कि आरोग्य, धन-धान्य, ऐश्वर्य समेत सर्व मंगल के कारक प्रत्यक्ष देव सूर्य धनु से मकर राशि में सुबह 8.24 बजे प्रवेश कर जाएंगे। इससे भी पहले सूर्योदय के साथ ही मकर संक्रांति जन्य पुण्य काल शुरू हो जाएगा, जो सूर्यास्त तक रहेगा। पूर्वा फाल्गुनी एवं उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र और शोभन एवं स्थिर योग रहेगा।

 गुरू और मंगल स्वराशि में रहेंगे। मकर संक्राांति पर तिल का उपयोग और दान फलदायी माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। भारतीय ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, सूर्य इसी दिन से उत्तरायण भी होते हैं। उत्तरायण सूर्य का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है और इसे देवताओं का दिन भी कहा गया है। इसी दिन से दिन की अवधि बढ़ती है और रात की अवधि घटती चली जाती है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर हुआ परिवर्तन मानते हैं।

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