संजीवनी टुडे

मासूम के गुनहगार को फांसी दिए जाने पर नाथ-शिवराज ने दी एक जैसी प्रतिक्रिया

संजीवनी टुडे 11-07-2019 17:25:40

मध्‍यप्रदेश की राजधानी में एक माह पूर्व घटी घटना में मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म करने के बाद की गई उसकी हत्‍या के आरोपित को गुरुवार को न्‍यायालय ने सजा-ए-मौत दी है।


भोपाल। मध्‍यप्रदेश की राजधानी में एक माह पूर्व घटी घटना में मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म करने के बाद की गई उसकी हत्‍या के आरोपित को गुरुवार को न्‍यायालय ने सजा-ए-मौत दी है। कोर्ट के आए इस फैसले का प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दोनों ने ही स्वागत योग्य कदम बताया। 

उल्‍लेखनीय है कि कमला नगर मांडवा बस्ती में रहनेवाली आठ साल की मासूम बच्ची जब 8 जून को घर के लिए कुछ सामान लेने बाहर निकली थी, तभी दोषी विष्‍णु बहलाकर-फुसलाकर अपने घर ले गया था। जहां उसने बच्‍ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी । शव दूसरे दिन 9 जून को नाले से बरामद किया गया। दोषी विष्णु बच्ची का पड़ोसी था। 

इस मामले में पुलिस ने 17 जून को कोर्ट में 108 पेज की चार्जशीट पेश की थी । 19 जून को कोर्ट में आरोप तय हुए। कोर्ट ने विष्णु बामोरे को बच्ची के साथ ज्यादती, अप्राकृतिक कृत्य और उसके बाद हत्या का दोषी माना और गुरुवार को भोपाल की विशेष अदालत ने बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुना दी है। 

घटना के 32वें दिन आए इस फैसले के बाद मुख्‍यमंत्री कमलनाथ से सोशल मीडिया के जरिए दी गई अपनी प्रतिक्रिया में कहा है, भोपाल की मांडवा बस्ती में 8 जून को हुई मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म व हत्या की घटना के आरोपित को आज न्यायालय द्वारा त्वरित लिया गया फांसी की सज़ा का फ़ैसला स्वागत योग्य है। कोर्ट के निर्णय पर  पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन कुछ दिक्‍कतें भी हैं, जिनका कोई न कोई उपाय हमें खोजना होगा ताकि दोषी कहीं से भी बच न सकें। 

शिवराज सिंह चौहान का कहना था कि इससे पहले भी 26 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। किंतु लोअर कोर्ट की सजा के बाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रपति महोदय तक गुहार लगाई जाती है, जिसमें कि कई बार दोषी को सजा में छूट मिलते हुए भी देखा गया है। इसलिए मैं चीफ जस्टिस से मांग करता हूं कि लोअर कोर्ट में जिन्हें फांसी की सजा दी जाए, उन्हें तत्काल फांसी पर लटका देना चाहिए। उन्‍होंने कहा है, ऐसे प्रकरणों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बने और जिसे दोषी करार दिया जाए उसे सजा के तुरंत बाद फांसी के फंदे पर लटका दिया जाए।

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