संजीवनी टुडे

बोरवेल से 48 घंटे के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया नदीम को

संजीवनी टुडे 22-03-2019 18:55:11


बालसमंद। हिसार जिले के राजस्थान की सीमा से सटे बालसमंद गांव में बोरवेल में गिरे बच्चे को 48 घंटे के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया | खेतों की ढाणियों के नजदीक सिंचाई के लिए खोदे गए बोरवेल में 20 मार्च को 18 माह का एक छोटा बच्चा नदीम गिर गया था। एनडीआरएफ की टीम ने 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार शाम को बच्चे को सही सलामत बाहर निकाल लिया । बोरवेल से 20 फुट दूर 54 फीट की गहराई से ड्रिलिंग के माध्यम से बच्चे तक पहुंचने के लिए एक टनल बनाया गया था और इसी रास्ते से बच्चे को बाहर निकाला गया है। बच्चे के सुरक्षित बाहर निकाले जाने पर गाँव में खुशी की लहर है। बच्चे को तत्काल सघन मेडिकल जांच के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है | 

बचाव कार्य में एनडीआरएफ की टीम और सेना के दल ने प्रशासन के साथ मिलकर बहुत ही सराहनीय काम किया। वहीं गांव वालों ने भी दिन-रात मेहनत और साधन जुटाकर बच्चे के बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई । बच्चे को निकलने के बाद तत्काल सघन मेडिकल जांच के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया | अस्पताल ले जाने के रास्ते में ट्रैफिक व्यवस्था को पहले से ही ठीक रखा गया था ताकि इलाज देने में विलम्ब नहीं हो | मात्र 240000/- में टोंक रोड जयपुर में प्लॉट 9314166166
जानकारी के अनुसार नदीम खान अन्य बच्चों के साथ अपने खेत में लगे एक पेड़ के नीचे खेल रहा था तभी अचानक खेत में सिंचाई के लिए खोदे गए बोरवेल में गिर पड़ा। बच्चों के शोर मचाने पर जब खेतों में काम कर रहे किसानों और उसके पिता आजम खान ने देखा तो तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस चौकी में दी जिसके उपरांत मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया। सूचना पाकर जिला उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। 
जानकारी मिलने के बाद सेना के जवानों का 20 सदस्य वाला दल भी मौके पर पहुंचा। रात लगभग 12:00 बजे एनडीआरएफ की टीम 17 सदस्य और तीन अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंची। इसके बाद बचाव कार्यों में तेजी लाई गई। बचाव कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए एनडीआरएफ सदस्यों ने बताया कि बोरवेल की गहराई 60 फीट थी और इसके साथ लगभग 70 फीट का एक गड्ढा खोदा गया जिसके बाद सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचने की योजना बनाई गई ताकि उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। बोरवेल के साथ 70 फीट के गड्ढे को खोदने के लिए आठ जेसीबी मशीनों और लगभग पांच ट्रैक्टरों का सहारा लिया गया। राहत कार्यों में लगे आर्मी और एनडीआरएफ सदस्यों ने कहा कि जमीन सख्त होने के कारण खुदाई में परेशानी आ रही थी।

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सूत्रों के अनुसार एनडीआरएफ की टीम द्वारा स्थानीय प्रशासन के सहयोग से हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से मिट्टी के नमूनों की जांच करवाई गई ताकि बचाव कार्य के दौरान तमाम सुरक्षा पहलुओं पर विचार किया जा सके। इस राहत कार्य में स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग के अलावा पुलिस के लगभग 50 से अधिक जवान-कर्मचारी ग्रामीणों की भीड़ को बोरवेल से दूर रखने के लिए रात भर मशक्कत करते रहे।
 

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