संजीवनी टुडे

एक किनारे पर नमाज तो दूसरे पर होती है छठ पूजा

संजीवनी टुडे 10-11-2018 16:32:24


कुशीनगर। जिले की हाटा तहसील के बकनहा गांव का पोखरा कृषि और पशुपालन के कार्य में योगदान देने के साथ-साथ साम्प्रदायिक सौहार्द को भी सींच रहा है। बकनहा और तुर्कवलिया गांव का इस संयुक्त पोखरा के एक किनारे में मुस्लिम वजू कर मजार पर नमाज अता करते हैं दूसरे किनारे पर हिन्दू स्नान कर मन्दिर में पूजा करते हैं। घाट पर महिलाएं छठ पूजा भी करती हैं। दोनों समुदायों के लोग मिलकर पोखरे के सरंक्षण में लगे हैं। कह सकते हैं 'कोई वजू करे मेरे जल से कोई मूरत को नहलाए ' गीत की पक्तियां पोखरे पर सटीक बैठती हैं।

सात एकड़ क्षेत्रफल में फैला यह साल के बारहों महीने पानी से लबालब रहता है। पर्यावरण संरक्षण के साथ लोग आस-पास के कई गांवों के भूगर्भ जल स्तर को मजबूत रखने में भी पोखरे का योगदान बताते हैं। पोखरा दो गांवों बकनहा और तुर्कवलिया की पुरखों से मिली सांझी विरासत है। 

आजादी के दो दशक बाद तक लोग नित्य के कार्यों के लिये पोखरे के जल का उपयोग करते थे। पर जैसे-जैसे जल के वैकल्पिक संसाधन मिलने लगे नित्य के कार्यों में इसका उपयोग बन्द हो गया। पर पशुओं को पानी पिलाने, जरूरी कार्यों और आस पड़ोस के खेतों की सिंचाई में पोखरे के जल का उपयोग बरकरार रहा। वर्तमान में पोखरा साम्प्रदायिक सौहार्द को सींचने के काम आ रहा है। 

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तुकवलिया दरियाव सिंह गांव के ग्राम प्रधान मुबारक हुसैन और बकनहा गांव के प्रधान जय प्रकाश यादव ने बताया कि राजस्व अभिलेखों में यह पोखरा दोनों गांव की संयुक्त सम्पत्ति है। दोनों गांव के लोग जल का उपयोग करने के साथ पोखरे का संरक्षण करते हैं। साफ सफाई से लेकर पेड़ पौधे लगाने की जिम्मेदारी दोनों ग्राम सभाएं उठाती ही हैं लोग सामुदायिक तरीके से सहयोग करते हैं।

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