संजीवनी टुडे

मां का आंचल व पिता की रणनीति भी नहीं बचा सकी तेजस्वी को

संजीवनी टुडे 24-05-2019 17:03:36


पटना। हर मैदान फतह करते हुए भाजपा नेतृत्व वाले राजग गठबंधन ने बिहार में 17वीं लोकसभा चुनाव में राजद नीत महागठबंधन को करारी शिकस्त दी। राजग ने 40 लोकसभा सीटों में 39 सीटों पर जीत दर्ज की और मात्र एक सीट पर उसे मात मिली।  महागठबंधन औंधे मुंह गिरा । सिर्फ किशनगंज से कांग्रेस प्रत्याशी मो. जावेद अशरफ ने अपनी जीत दर्ज की। उन्होंने 34466 मतों के अंतर से जदयू के महमूद अशरफ को शिकस्त दी जबकि महागठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी राजद का खात तक नहीं खुल पाया।

जैसे- जैसे चुनाव परिणामों की घोषणा होती गयी वैसे-वैसे महागठबंधन के घटक दलों की औकात जगजाहिर होने लगी।  उपेंद्र कुशवाह,मीरा कुमार, रघुवंश प्रसाद सिंह और अब्दुल बारी सिद्दीकी को पटखनी खानी पड़ी जबकि गठबंधन के दिग्गज बेगूसराय से गिरिराज सिंह, मधुबनी से अशोक यादव,पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव, ​शिवहर में रमा देवी और मुजफ्फरपुर से अजय निषाद सहित एनडीए के 25 नेताओं को दो लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीत मिली। 

राजद की हार पर उठने लगे सवाल
अपनी इस प्रचंड जीत से एनडीए खेमा तो गदगद है लेकिन महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद पर कई सवाल उठ रहे और नेता से लेकर जनता तक  राजद की जबदस्त हार का कारण लालू के पारिवारिक विवाद और तेजप्रताप यादव की ओर से लगातार खड़ी की गयी मुसीबतों को माना जा रहा है। कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि लालू की अनुपस्थिति में हुए चुनाव में तेजस्वी लालू और जनता दोनों के समक्ष फेल हो गये। हालांकि ऐसा नहीं कि तेजस्वी ने महागठबंधन को जिताने में कोई कोर कसर छोड़ी होगी। तेजस्वी ने इस बार महागठबंधन में अपने पिता लालू प्रसाद की भूमिका निभाने की पूरी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाये। यह पहला चुनाव था जिसमें करीब तीन दशकों से बिहार की राजनीति के पर्याय बने राजद अध्यक्ष लालू यादव प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी रूप में चुनाव मैदान में नहीं उतरे। सिर्फ प्रत्याशी चयन में उनकी भूमिका दिखी।

महागठबंधन को सत्ता में लाने की जिम्मेवारी उन्होंने अपने बेटे तेजस्वी यादव को सौंप दी। सुपौल को छोड़कर तेजस्वी ने पूरे बिहार में सवा दो सौ से ज्यादा सभाएं कीं और दर्जनों रोड शो किये। कांग्रेस ने अपनी कई सीटों पर अपने उम्मीदवार की जीत का जिम्मा भी तेजस्वी पर ही छोड़ दिया। महागठबंधन के अन्य दल रालोसपा, वीआईपी और हम ने भी तेजस्वी को ही सर्वेसर्वा मान लिया। इस बीच एक दो लोकसभा क्षेत्र में हुई चुनावी सभाओं में तेजस्वी की अनुपस्थिति ने भी वोटरों के मन में ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न कर दी थी। कुछ लोग इसे भी हार का एक कारण मानते हैं।       

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चुनाव परिणाम के बाद राजद परिवार में विवाद 
सुख के सब साथी, दु:ख में न कोई की पंक्ति तेजस्वी के साथ चुनावी परिणाम आने के साथ सच साबित होने लगी है। परिवार के साथ महागठबंधन के अन्य दलों को छोड़ दें तो राजद में ही विरोध के सुर सुनायी देने लगे हैं। शनिवार को चुनाव परिणाम सामने आते ही राजद और लालू के परिवार में कलह शुरु हो गया। लालू के घर में शनिवार को तेजस्वी और मीसा भारती के बीच काफी देर तक कहासुनी चलती रही। इसे लेकर राजद नेता भी अब कानाफूसी करने लगे हैं कि तेजस्वी अपनी पहली ही परीक्षा में फेल हो गए हैं। राजद के नेताओं और समर्थकों का मानना है कि राजद ने अपने साथ—साथ सहयोगियों की भी लुटिया डुबो डाली। पीएम मोदी के राष्ट्रवाद ने राजद के जातिवाद को बहुत पीछे छोड़ दिया। 

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