संजीवनी टुडे

कुम्भ मेले से निकाला गया सात हजार मीट्रिक टन से अधिक कचरा

संजीवनी टुडे 23-02-2019 16:58:05


कुम्भ नगरी। कुम्भ मेले से अब तक सात हजार मीट्रिक टन से अधिक कचरा एकत्र करके बाहर निकाला गया। स्वच्छता के इस कार्य में योगदान करने वाले स्वच्छाग्रहियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं रविवार को सम्मानित करने के लिए कुम्भ मेले में आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शनिवार को यहां पत्रकारों को बताया कि कुम्भ मेले में आधुनिक तथा वैज्ञानिक तरीके से पर्यावरण प्रदूषण रोकने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए शौचालयों में सेप्टिक टैंकों का प्रयोग किया गया। 

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मेला क्षेत्र में सीवर लाइनों का निर्माण तथा संचालन कर स्वच्छता के साथ मल प्रवहन की व्यवस्था बनाते हुए एसटीपी या जिओ ट्यूब्स के द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट का इंतजाम किया गया। सेप्टिक टैंकों से तरल कचरे को निरंतर निकालकर बाहर ले जाते रहने का कुशल प्रबन्धन, शौचालयों को निरंतर स्वच्छ तथा प्रयोग योग्य बनाये रखने की व्यवस्थ पर निरंतर निगरानी की जाती रही। परिणाम स्वरूप पूरे मेले के दौरान शौचालय स्वच्छ रहे। इसक कार्य को पूरा करने में 1500 स्वच्छाग्रहियों की सेवा कारगर रही। 

मंत्री ने बताया कि कुम्भ मेले को ओडीएफ रखने की रणनीति एक वर्ष पूर्व से ही स्वच्छाग्रहियों के माध्यम से खुले में शौच के खिलाफ लगातार व्यापाक जनजागरण, मेला और गंगातट को स्वच्छ रखने के जागरूकता अभियानों एवं कार्यक्रमों लगातार श्रृंखला से जनमानस को प्रेरित करने में सफलता, खुले में शौच रोकने के लिए स्वच्छाग्रहियों ने हर स्तर पर लगातार प्रयास किया। सिद्धार्थनाथ ने बताया कि कुम्भ मेले में अत्याधुनिक तकनीकी तैयार करने के लिए एमएनआईटी प्रयागराज, आईआईटी कानपुर, बंगलेरू और लखनऊ विश्वविद्यालय सहित कुल बीस तकनीकी छात्रों को जोड़ा गया। इनका सहयोग लेकर 65 हजार लीटर पानी तैयार किया जाता था। कुम्भ मेला 3200 हेक्टेयर क्षेत्र में है, जिसे 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया। इससे सफाई प्रबन्ध को गति मिली। 

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मेला क्षेत्र की कुल 350 किलो मीटर सड़कें सफाई प्रबन्धन में सहायक बनीं। एक लाख बाइस हजार पांच सौ शौचालयों की स्थापना का संकल्प मेले को स्वच्छ रखने में सबसे कारगर रहा। परिणामस्वरूप कुम्भ नगर को खुले में शौच मुक्त रखने की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल हुई। 20 हजार से अधिक डस्टबिन का प्रयोग मेले में लाया गया। नदियों के कचरे और प्रदूषित प्रवाह से मुक्त रखने में सफलता मिली। स्वच्छता कार्य में लगने वाले सभी कार्यदायी विभागों तथा संस्थानों का निरंतर तथा निर्वाध समन्वय बनाये रखा। एकत्रीकरण करते रहने की संगठित एवं चाक-चौबन्द व्यवस्था, हर कोने में लाइनर बैग में बंद कचरा डस्टबिन से उठाकर हाथगाड़ी, टिपर गाड़ियों तथा काम्पैक्टरों के द्वारा मेलाक्षेत्र के बाहर तक पहुंचाने में कारगार साबित हुई। इस कार्य में 38 ट्रांसफर स्टेशन की व्यवस्था संचालित जहां से कचरे के बैग मेले के बाहर भेजे जा सके। इसके लिए दस हजार से अधिक सफाई कर्मियों का लगातार योगदान मिला। 

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