संजीवनी टुडे

बदायूँ में 50 दिनों में 24 से अधिक नवजात शिशुओं की मौत

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 12-08-2019 15:11:03

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिला महिला अस्पताल में संक्रमण के चलते पिछले 50 दिनों के दौरान 24 से अधिक नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी है जबकि 30 से अधिक बच्चे जिदंगी मौत की लडाई लड रहे है।


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिला महिला अस्पताल में संक्रमण के चलते पिछले 50 दिनों के दौरान 24 से अधिक नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी है जबकि 30 से अधिक बच्चे जिदंगी मौत की लडाई लड रहे है। इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी भी स्वास्थ्य विभाग अभी तक बच्चों की मौत के ठोस कारण नहीं खोज सका है।

आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि महिला अस्पताल स्थित स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में संक्रमण फैलने से पिछले पचास दिनों में लगभग दो दर्जन बच्चों की मौत हो चुकी है और अभी भी लगभग 30 बच्चे जिंदगी-मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। अस्पताल के डॉक्टर बच्चों को निजी अस्पतालों में रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।

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प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0मंजीत सिंह से ने बताया कि अब तक जिन बच्चों की मौतें हुई हैं उनमें से सभी नवजात कुपोषण के शिकार थे और उनका बजन बहुत कम था। डॉ सिंह ने बताया कि कुपोषण के शिकार जिन बच्चों का वज़न अत्यधिक कम होता है उनको बचा पाना बहुत ही दुष्कर होता है और इलाज के दौरान अधिकतर ऐसे बच्चों की मौत हो जाया करती है। 

उन्होने किसी प्रकार के संक्रमण से नवजात बच्चों की मौत होने से इनकार करते हुए कहा कि स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में किसी भी प्रकार का कोई संक्रमण नहीं फैला है वहां सफाई इत्यादि का पूरा ध्यान रखा जा रहा है जिन बच्चों की भी मौत हुई है वह यादव कुपोषण का शिकार थे या फिर पूर्ण रूप से विकसित नहीं थे यही उनकी मौत की वजह रही है।

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दूसरी ओर भर्ती बच्चों का इलाज करने वाले डाक्टर संदीप वार्ष्णेय का कहना है कि नवजात शिशुओं की मौत वहां पर फैले हुए संक्रमण की वजह से हुई है। डॉ संदीप का कहना है कि वार्ड में संक्रमण फैला हुआ है। प्रत्येक तीन वर्ष में माइक्रो बायोलॉजिकल सर्वे एवं संक्रमण की जांच के लिये ब्लड कल्चर टेस्ट होना आवश्यक होता है लेकिप यह सुविधा जिला अस्पताल मैं उपलब्ध ही नहीं है।

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उन्होंने बताया की अधिक संख्या में आने वाले बीमार शिशुओं की वजह से अस्पताल में बेड की बहुत कमी हो गई है जिसके कारण हालात ऐसे उत्पन्न हो गए हैं कि एक एक बेड पर दो-दो बच्चो को भर्ती कर मिटाया जा रहा है ऐसे में समस्या यह आती है कि कोई संक्रमण ग्रस्त बच्चा सामान्य अथवा कुपोषित बच्चे के साथ मिटा दिया जाता है तो उस बच्चे को भी संक्रमित होने का पूरा खतरा बना रहता है।

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