संजीवनी टुडे

मोदी सरकार ने रोजगार के मसले पर जनता को बड़ा धोखा दिया है: कन्हैया

संजीवनी टुडे 23-04-2019 18:02:17


बेगूसराय। किसान और जवान दोनों प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। तब अरबों रुपये खर्च करके भी असलियत पर परदा डालना भाजपा के लिए असंभव हो गया है। जनता के सामने अपनी असलियत सामने आने पर भाजपा में जो बौखलाहट छाई है उसी का नतीजा है कि आज असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए उसके नेता शहीदों का अपमान करने जैसी शर्मनाक हरकत कर रहे हैं। यह बात कन्हैया कुमार ने मंगलवार को जनसम्पर्क अभियान के दौरान कही। कन्हैया ने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार के मसले पर जनता को बड़ा धोखा दिया है। 

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नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम के दस हजार करोड़ रुपये के कुल आवंटन का दो प्रतिशत भी खर्च नहीं किया गया है। जिस देश में बेरोजगारी चरम पर है, वहां रोजगार से जुड़ी योजना का ऐसा हाल करने वाली भाजपा सरकार ने पिछले पांच साल में जुमले गिराने के अलावा और कोई काम नहीं किया है। कन्हैया ने 24 अप्रैल को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेगूसराय आमगन की खबर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस उम्मीदवार को बेगूसराय भेजने के लिए पार्टी अध्यक्ष को इतनी मेहनत करनी पड़ी अब उन्हें यह देखने के लिए यहां आना ही था कि कहीं उम्मीदवार बेमन से तो काम नहीं कर रहे हैं। 

दूसरी पार्टियों के नेताओं के लिए 'कुत्ता', 'बिल्ली', 'सांप' जैसे शब्दों का प्रयोग करने वाले अमित शाह लोकतंत्र का कितना सम्मान करते हैं यह उनके बयानों से ही साफ पता चल जाता है। लेकिन बेगूसराय की जनता वोट के लिए लोकतंत्र पर चोट करने वालों की असलियत जानती है। कन्हैया ने कहा कि बेगूसराय की जनता नफरत फैलाने वालों का समर्थन नहीं करने वाली है। कन्हैया ने कहा कि सेना में बेहतर सुविधाओं की मांग करने पर जवानों को और फसल की सही कीमत मांगने पर किसानों को बदनाम करने की कोशिश करने से पहले एक पल भी नहीं सोचते। पहले सरकारें काम नहीं कर पाने पर सवाल पूछने पर बहाना बनाती थी। 

भाजपा काम नहीं करने के बाद असलियत छिपाने के लिए ऐसे आंकड़े तैयार करती है जिन पर न देश के विशेषज्ञ भरोसा करते हैं न विदेश के। सड़कों का कायाकल्प करने का दावा करने वाली भाजपा को बेगूसराय में रजौरा से चांदपुरा तक जाने वाली सड़क पर नजर दौड़ानी चाहिए जिसकी हालत इतनी खराब है कि यहां के स्थानीय निवासियों को उसे ठीक कराने के लिए बार-बार विरोध प्रदर्शन करना पड़ता है। 

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सरकारी फाइलों के आंकड़ों की चकाचौंध की असलियत जानने के लिए जमीन पर किसान-मजदूरों की मायूसी को महसूस करना ही काफी होता है। भाजपा जिस फसल बीमा योजना का गुणगान करती है, उसकी सच्चाई बेगूसराय के किसानों से पूछी जा सकती है। यही हाल उज्ज्वला योजना का है जो सिर्फ भाजपा के चुनावी दावों में सफल नजर आती है।

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