संजीवनी टुडे

जल, पर्यावरण व खाद्यान्न में मिलावट देश के पतन का बड़ा कारणः स्वरूपानंद

संजीवनी टुडे 11-06-2019 15:59:29

धन की अपवित्रता बढ़ने और अनैतिक रूप से जीवोपार्जन करने के कारण देश में राजनैतिक, भौतिक व अध्यात्मिकता का ह्रास हुआ है। देश में ईमानदारी आनी चाहिए। तभी इसे रोका जा सकता है। महिलाओं को दाह संस्कार का शास्त्रोक्त अधिकार नहीं है। महिलाओं के दाह संस्कार व पिण्डदान करने से पितृ अद्योगति का प्राप्त होते हैं।


हरिद्वार। धन की अपवित्रता बढ़ने और अनैतिक रूप से जीवोपार्जन करने के कारण देश में राजनैतिक,  भौतिक व अध्यात्मिकता का ह्रास हुआ है। देश में ईमानदारी आनी चाहिए। तभी इसे रोका जा सकता है। महिलाओं को दाह संस्कार का शास्त्रोक्त अधिकार नहीं है। महिलाओं के दाह संस्कार व पिण्डदान करने से पितृ अद्योगति का प्राप्त होते हैं। जहां कोई परिवारजन व पुत्र न हो तो वहां महिलाएं दाह संस्कार कर सकती है। उक्त बात ज्योतिष, द्वारिकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मंगलवार को कनखल स्थित अपने मठ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कही। 

शंकराचार्य ने कहा कि आज धन का अनादर हो रहा है। ईमानदारी कम हो चुकी है। मिलावट भी हर क्षेत्र में अपने पैर पसार चुकी है। चरक संहिता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जहां जल, पर्यावरण व खाद्यान्न में मिलावट होती है वहां देश विनाश की ओर अग्रसर होता जाता है। जिसका सीधा प्रभाव जीवन पर पड़ रहा है और यही  देश की अवनति का प्रमुख कारण है। इस पर विद्वान लोगों को विचार करने की आवश्यकता है। 

अन्तरजातीय विवाह का विरोध करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अन्तरजातीय विवाह होने से वर्ण शंकर संतान उत्पन्न होती है। ऐसे में जब वर्णशंकर संतान श्राद्ध-तर्पण्रा करती है तो पितृ अद्योगति को प्राप्त होते हैं। जबकि मनुष्य पर माता-पिता और पितृों के आशीर्वाद का सीधा प्रभाव होता है। वहीं महिलाओं को दाह संस्कार करना भी शास्त्रा में निषेध बताया गया है। जहां परिवार में कोई सजातीय पुरूष अथवा पुत्र या कन्या का पुत्र न हो वहां युवतियां दाह संस्कार कर सकती हैं। 

देश में लगातार बढ़ रहे दुराचार के मामलों पर उन्होंने कहा कि नशा इस पाप की सबसे बड़ी वजह है। नशा करने के बाद व्यक्ति का अच्छे-बुरे का भान नहीं रहता। होश आने पर वह पछताता है और इसी कारण से दुराचार करने के बाद हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम दे देता है। उन्होंने कहा कि सरकार को विदेशों से आ रहे नशे के सामान पर रोक के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा  कि नशा हमारी संस्कृति का नष्ट करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कर्म के सिद्धांत के लिए जेल में बंद कैदियों के लिए गीता, रामायण जैसे ग्रंथों की शिक्षा देने पर भी बल दिया। 

उत्तराखण्ड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा  कि तीर्थाटन और पर्यटन अलग हैं। पर्यटन का आर्थिक सुदृढता के लिए बढ़ावा देना सरकार की नीति बन गई है। जबकि तीर्थाटन पर्यटन से अलग है। पयर्टन को बढ़ावा देने के साथ देवभूमि की गरिमा को बनाए रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने जौलीग्रांट हवाई अड्डे का नाम शंकराचार्य के नाम पर किए जाने की भी सरकार से मांग की। 

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