संजीवनी टुडे

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 150 ग्राम सभाओं का विशाल आंदोलन

संजीवनी टुडे 24-02-2019 22:30:07


कोरबा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 फरवरी को देश के लाखों आदिवासियों व वन समुदायों के खिलाफ आये आदेश के खिलाफ कोरबा ज़िले के ग्राम मोरगा में रविवार को 150 ग्राम सभाओं ने अपना विरोध आंदोलन की शुरुआत की। अपनी तरह के यह और विशेष आयोजन में 150 ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों के अलावा पंचायती राज जन प्रतिनिधियों, संगठन के साथियों व छत्तीसगढ़ सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रेम सिंह साय भी शामिल हुए। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन एवं हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन की पृष्ठभूमि रखते हुए छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने 13 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश पर गंभीर चिंता जताई जिसमें वनाधिकार दावा निरस्तीकरण के पश्चात वन-क्षेत्रों से बेदखली किए जाने के निर्देश दिये हैं। 

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हिन्दुस्थान समाचार से बात करते हुए उन्होंने वन अधिकार कानून का हवाला देते हुए इसे भारी भूल कहा और कहा कि जिन दावों को निरस्त माना गया है, वो वास्तव में अभी भी मान्यता की प्रक्रिया के अधीन हैं, जिन पर पुनर्विचार की ज़रूरत है। कैबिनेट मंत्री प्रेम सिंह साय ने कहा कि भूपेश बघेल की सरकार आदिवासी हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वन अधिकार कानून का क्रियान्वयन उनकी सरकार कि पहली प्राथमिकता है। उन्होने कहा कि हमारी सरकार यह मानती है कि वन-निवासियों का अधिकार तो प्रकृतिक रूप से है उसे कोई नहीं छीन सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार करने की बात करते हुए उन्होने कहा कि हम कानून के सलाहकारों से इस बात पर चर्चा कर इस मामले पर फैसला लेंगे।
 
साथ ही उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 22 जनवरी 2019 को ही इन निरस्त कहे जाने वाले दावों की पुनर्समीक्षा करने के लिए दिशा निर्देश तय किए जाने की ज़रूरत को रेखांकित किया और 23 जनवरी को इस कानून के तमाम पक्षों पर काम कर रहे अधिकारियों व सिविल सोसायटी के लोगों के साथ मिलकर एक प्रभावी कार्य -योजना बनाने की पहल की है। इस कार्य-योजना में आदिम जतियों के पर्यावास अधिकार, लघु वनोपाज पर ग्राम सभा का स्वामित्व और वन संसाधनों पर सामुदायिक नियंत्रण के अलावा जो भी महत्वपूर्ण अधिकार हैं उन्हें शामिल किया जाएगा। पेसा कानून के प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए एक नियमावली सभी की भागीदारी से बनाई जाएगी। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष और जनपद पंचायत सदस्य उमेश्वर सिंह पोरते ने कहा कि पिछले 15 सालों में राज्य में पेसा कानून और पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में जान बूझकर बड़ी–बड़ी कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने के लिए आदिवासी हितों,पर्यावरण के हितों के तमाम प्रावधानों को गंभीर चोट पहुंचाई गयी और स्थितियाँ बहुत भयावह बना दी गई हैं। यहाँ तक कि पेसा कानून के क्रियान्वयन हेतु अभी तक प्रदेश में इसकी नियमावली तक नहीं बनाई गयी है।

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भूमि अधिकार आंदोलन दिल्ली से आए सत्यम ने पाँचवीं अनुसूची, ग्यारहवीं अनुसूची स्व-शासन के लिए पेसा कानून के क्रियान्वयन पर ज़ोर देते हुए, इस व्यवस्था को अफसरशाही से मुक्त कराने की ज़रूरत पर बल दिया।
दलित आदिवासी मंच के देवेंद्र बघेल और वरिष्ठ किसान नेता आनंद मिश्रा ने आदिवासियों की संस्कृति और प्राकृतिक ज्ञान का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे आदिवासी एवं वन निवासी वनों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनके अभाव में पूरी वन-सम्पदा नष्ट हो जाएगी | ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के बेदखली का आदेश बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है जिस पर उसे पुनर्विचार करना चाहिए | सम्मेलन में प्रदेश भर से आए ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के आंदोलन को अपना समर्थन दिया एकजुटता दिखाई। सम्मेलन में ग्राम सभाओं की तरफ से मंत्री प्रेम सिंह साई को एक मांग-पत्र भी सौंपा। जिसे उन्होंने संज्ञान में लेकर सभी विषयों पर उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है | सम्मेलन में 53 सरपंच, 5 जनपद सदस्य, जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष के साथ साथ समाजवादी किसान नेता आनंद मिश्रा, किसान सभा से नन्द काश्यप,जनाधिकार संगठन कांकेर से केशव शोरी, सोनाखान क्षेत्र से दलित आदिवासी मंच के देवेंद्र बघेल, कोरिया से कुमार गिरीश, ऊर्जाधानी भू-विस्थापित संघर्ष समिति से मंजीत यादव एवं सोनू राठोर, ग्राम-मित्र करतला से मुनीम शुक्ला, पोड़ी से मनोज जांगड़े, वसुंधरा संस्था ओडिसा से बिभोर देव समेत कई जन-संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बातों को रखा |

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