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धूमधाम से मनाया जा रहा है महाशिवरात्रि पर्व, लाखों श्रद्धालुओं ने किये बाबा महाकाल के दर्शन

संजीवनी टुडे 21-02-2020 17:52:50

महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को अलसुबह करीब ढाई बजे मंदिर के पट खुल गए थे और तडक़े साढ़े चार बजे बाबा महाकाल की भस्मारती सम्पन्न हुई। इसके बाद भांग एवं सूखे मेवे से श्रृंगार करके बाबा को नवीन वस्त्र धारण करवाए गए।


उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में शुक्रवार को महाशिवरात्रि शहर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए जनसमूह उमड़ पड़ा है। अलसुबह से लेकर दोपहर तक करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर लिए थे। यहां देर रात ढाई से तीन लाख श्रद्धालु के पहुंचने की संभावना है। सुबह से ही गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। नंदी हाल के पीछे लगे पीतल के बेरीकेट्स से दर्शन करवाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक देखने को मिल रहा है कि कतार हरसिद्धि मंदिर चौराहे से भी पीछे तक निकल गई। भक्तों को सुगमता से दर्शन कराने के लिए जहां प्रशासन मुस्तैद है वहीं कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अमला चाक चौबंद है।

महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को अलसुबह करीब ढाई बजे मंदिर के पट खुल गए थे और तडक़े साढ़े चार बजे बाबा महाकाल की भस्मारती सम्पन्न हुई। इसके बाद भांग एवं सूखे मेवे से श्रृंगार करके बाबा को नवीन वस्त्र धारण करवाए गए। इधर बाबा के दर्शन का सिलसिला अर्धरात्रि से ही जारी रहा, जो सतत शनिवार रात्रि को शयन आरती के पूर्व तक चलेगा। शुक्रवार को महाशिवरात्रि पर्व पर प्रात: 7.30 से 8.15 तक दद्योदक आरती हुई। प्रात: 10.30 से 11.15 बजे तक भोग आरती हुई। दोपहर 12 से 1 बजे तक शासकीय अभिषेक-पूजन हुआ। इसके बाद होलकर एवं सिंधिया परिवार द्वारा वंशपरंपरानुसार अभिषेक हुआ।  अपराह्न 3 से कोटेश्वर भगवान का पूजन अभिषेक हुआ। 

रात्रि 8 बजे से होगी महापूजा

महाशिवरात्रि पर रात 8 से 10 बजे तक शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा के सान्निध्य में कोटेश्वर महादेव का पंचामृत पूजन, सप्तधान अर्पण के बाद पुष्प मुकुट श्रृंगार आरती होगी। रात्रि 11 बजे से मंदिर गर्भगृह में महाकालेश्वर भगवान की महापूजा एवं अभिषेक (भस्म धूलन, रूद्राक्ष माला धारण, भू-शुद्धी, भूत-शुद्धी, अंतर्मात्रिका, बर्हिर्मात्रिका, महान्यास, लघुन्यास, रूद्र पूजन, पंचवत्र पूजन) होगा। महाकालेश्वर को शिव सहस्त्र नामावली से बिल्वपत्र अर्पित कर पंचामृत एवं विभिन्न प्रकार के फलों के रस से अभिषेक कराया जाएगा।

वहीं, शनिवार प्रात: 4 बजे से भगवान को सप्तधान्य का मुखौटा धारण कराया जाएगा। सप्तधान्य (चावल, मूंग खड़ा, तिल, मसूर खड़ा, गेहूं, जौ, साल) चढ़ाया जाएगा। बाबा को सवा मन फूलों का पुष्प मुकुट बांधा जाएगा तथा सोने के कुण्डल, छत्र व मोरपंख, सोने का त्रिपुण्ड से सुसज्जित किया जाएगा।  प्रात: 6 बजे पुष्प मुकुट आरती होगी तथा बाबा महाकाल पर चांदी के बिल्वपत्र व सिक्के न्यौछावर किए जाएंगे।  प्रात: 11 बजे से दिन की भस्मार्ती समाप्त होने तक मंदिर में प्रवेश बंद रहेगा। इस दिन साल में एक बार होने वाली भस्मार्ती दोपहर 12 बजे होगी। दोपहर 12 बजे होने वाली भस्मारती में केवल अनुमति पत्र धारी दर्शनार्थियों को ही प्रवेश दिया जाएगा। प्रात: 10.30 बजे होनेवाली भोग आरती 12 बजे वाली भस्मार्ती के पश्चात दोपहर 2 बजे होगी।  सायं आरती एवं रात्रि आरती के पश्चात रात्रि 11 बजे पट मंगल होंगे। इस दौरान सतत पट खुले रहेंगे।

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