संजीवनी टुडे

कोरोना से संजीदगी से लड़ता महाराष्ट्र

-निर्मल कुमार शर्मा

संजीवनी टुडे 29-05-2020 14:45:55

कोरोना संक्रमण से अगर कोई ईमानदारी और संजीदगी से लड़कर पार पाया तो कुछ दिनों पूर्व समाचारों में सुर्खियों में रहे राजस्थान का एक गुमनाम सा जिला भीलवाड़ा रहा,जिसने जर्मनी की तरह अपने हर नागरिकों का संजीदगी से जाँच किया और उसके तद्नुरूप उन सभी लोगों का ईलाज भी किया, जिससे आज वहाँ कोरोना संक्रमित मरीज की संख्या शून्य है।


कोरोना संक्रमण से अगर कोई ईमानदारी और संजीदगी से लड़कर पार पाया तो कुछ दिनों पूर्व समाचारों में सुर्खियों में रहे राजस्थान का एक गुमनाम सा जिला भीलवाड़ा रहा,जिसने जर्मनी की तरह अपने हर नागरिकों का संजीदगी से जाँच किया और उसके तद्नुरूप उन सभी लोगों का ईलाज भी किया,जिससे आज वहाँ 'कोरोना संक्रमित मरीज की संख्या ' शून्य है। उसी तर्ज पर आज भारत के सभी राज्यों में औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से अव्वल रहने वाले महाराष्ट्र राज्य चलता दिख रहा है। समाचार पत्रों की खबरों के अनुसार आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अपने दल शिवसेना के स्थापित छवि को ध्वस्त करते हुए जनकल्याकारी व गरीबोन्मुखी कार्यक्रमों के लिए खुद को पूर्ण समर्पित कर दिया है। श्री उद्धव ठाकरे जी ने अपने राज्य में दूसरे राज्यों से आए मजदूरों ( जिन्हें आजकल 'प्रवासी मजदूर ' कहने का एक ट्रेंड सा चल गया है )के लिए अपना व्यक्तिगत प्रयास से महाराष्ट्र जैसे राज्य में ऐसा माहौल बनाने का भरसक प्रयास किया है, ताकि ये मजदूर लोग भूख-प्यास और उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों जैसे पुलिस के निर्मम लाठी की चोट से प्रताड़ित न हों।आज तक महाराष्ट्र में किसी मजदूर को 'भूख से मौत ' की खबर नहीं आई है।

इसके अलावे महाराष्ट्र की पूरी सरकारी मशीनरी अपनी पूरी निष्ठा, कर्मठता और ईमानदारी से कोरोना वायरस को हराने के लिए पूर्णतः कटिबद्ध हैं, वे ताली, थाली, शंख, दीपक, टॉर्च, व फ्लैश लाइट चमकाकर कोरोना वायरस को भगाने के 'टोटके व मूर्खतापूर्ण कुकृत्य ' की जगह महाराष्ट्र इस देश का पहला राज्य बन गया है,जो अपनी जाँच का दायरा बहुत विस्तृत किया है, वह अपने संभावित हर मरीज तक पहुँचने की ईमानदारी से कोशिश किया है। इसका सुफल यह मिला है कि महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के दोगुने होने की अवधि को 3 दिन से बढ़ाकर अब 14 दिन कर दिया है। इस राज्य में अप्रैल में कोलोना संक्रमित मरीजों की मृत्युदर 7.6 प्रतिशत से घटकर अब 3.25 प्रतिशत रह गई है।

अन्य राज्यों व केन्द्र सरकार को भी अब महाराष्ट्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। केवल अधिकाधिक राज्यों में छल-बल-लालच-पैसे के बल पर सत्ता हथियाने की हवश को अब विराम देकर भारत की भूख-प्यास,कोरोना वायरस और जीवन की मूलभूत जरूरतों की कमी से सिसकती,विलखती और मरती आम जनता के जख्मों पर मरहम लगाने का नेक कार्य भी थोड़ा-बहुत कर लेना चाहिए। केन्द्र के सत्ता के अहंकार में डूबे शासकों व अन्य राज्यों के अहंकार में डूबे शासकों ( मुख्यमंत्रियों ) को याद रखना चाहिए कि 'लाठी के बल पर क्रूर शासन की अवधि बहुत ज्यादे दीर्घजीवी नहीं होती ! बल्कि प्रजा ( जनता ) की दुःख-तकलीफों के समुचित निराकरण करने की व्यवस्था करना ही किसी भी शासक का परम्,पुनीत व पावन तथा अभीष्ट कर्तव्य है और सत्ता की दीर्घजीविता भी जनता के लिए किए जाने वाले कल्याणकारी कार्यों से ही तय होती है। 

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