संजीवनी टुडे

अभियोजन विभाग के निदेशक नरशेर के विरुद्ध मामला दर्ज़ करने के आदेश

संजीवनी टुडे 02-07-2019 18:41:40

अभियोजन विभाग के निदेशक नरशेर के विरुद्ध मामला दर्ज़ करने के आदेश


चंडीगढ़। हरियाणा के लोकायुक्त जस्टिस नवल किशोर अग्रवाल ने अभियोजन विभाग के निदेशक नरशेर के विरुद्ध मामला दर्ज़ करने के आदेश जारी किये है। नरशेर के विरुद्ध जिला अटार्नी के पद का दुरुपयोग और भ्रष्ट  कार्रवाइयों के आरोप थे। छह वर्ष चले इस मामले में लोकायुक्त ने ये निर्णय दिया है। लोकायुक्त ने आदेश पर नरशेर सिंह के विरुद्ध विभागीय जांच भी समानांतर चलेगी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस पूरे मामले की जांच करेगा।  

प्रोसीक्यूशन विभाग के निदेशक नरशेर सिंह के विरुद्ध वर्ष 2013 में शिकायत दर्ज करवाने वाले भिवानी निवासी धीरज कुमार ने बताया कि नरशेर सिंह ने रोहतक व भिवानी में जिला अटार्नी के पद पर रहते हुए न केवल खुलेआम सम्पति खरीद-फरोख्त का काम किया बल्कि अपनी पत्नी व भाई के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों का लेनदेन भी किया। धीरज के अनुसार नरशेर सिंह ने फरीदाबाद में तैनाती के समय सरकार को दो करोड़ 33 लाख रुपए का नुकसान भी पहुंचाया। 

नरशेर सिंह के विरूद्ध आरटीआई से जुटाई जानकारी के आधार पर उन्होंने बताया कि उक्त अधिकारी ने रोहतक में रहते हुए बनियानी निवासी अजमेर की बहन की दहेज हत्या के मामले में 25 हजार रुपये की रिश्वत कथित तौर पर ली। फैसला पीडि़तों के पक्ष में नहीं आने पर अजमेर सिंह व उनके वकील ने जब शिकायत की तो नरशेर सिंह ने आनन-फानन में तीन हजार रुपए का चेक थमा दिया।

धीरज कुमार ने इस बारे में विभाग के आला अधिकारियों को शिकायत दी लेकिन कोई कार्रवाई करने की बजाय वर्ष 2012-2013 के दौरान गृह विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक ने नरशेर सिंह की एसीआर में किसी कार्रवाई का जिक्र करने की बजाय केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया। इसके बाद धीरज कुमार ने हरियाणा के तत्कालीन लोकायुक्त की अदालत में यह केस दायर किया। 

लोकायुक्त प्रीतम सिंह पाल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यहां आए लोकायुक्त नवल किशोर अग्रवाल ने भी इस मामले में सुनवाई जारी रखी। करीब छह साल बाद लोकायुक्त अग्रवाल ने नरशेर सिंह के विरूद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। लोकायुक्त ने आदेश जारी किए हैं कि इस पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपी जाए। जांच की अवधि के दौरान अगर सरकार नरशेर सिंह को कोई नियुक्ति देती है तो उसे लोकायुक्त के संज्ञान में लाना जरूरी है। उल्लेखनीय है कि  यह मामला पूर्व लोकायुक्त प्रीतम सिंह पाल के कार्यकाल से विचाराधीन था।  

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