संजीवनी टुडे

लोकसभा चुनाव : मेनका गांधी चुनाव लडऩे के लिए राजी नहीं हुई तो कई स्थानीय नेता भी हैं टिकट लेने की कतार में

संजीवनी टुडे 22-03-2019 17:54:29


कुरुक्षेत्र। भाजपा नेता एवं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का नाम कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से करीब तय माना जा रहा है। हालांकि उनका ख्वाब करनाल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडऩे का है, लेकिन प्रदेश चुनाव समिति ने केंद्रीय चुनाव समिति को उन्हें कुरुक्षेत्र में उतारने का परार्मश दिया है। अब यह देखना है कि केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडऩे के लिए तैयार होगी या फिर नहीं। कारण यह है कि उनकी मनपसंद सीट तो करनाल ही है। ऐसे में अभी तक कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में अभी तक संशय बना हुआ है। मेनका गांधी का नाम कुरुक्षेत्र में आने के बाद से स्थानीय नेताओं में मायूसी छा गई है। अब तक कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से तीन-चार नेताओं के नाम इस सीट के लिए उभर कर आ रहे थे। अब इन नेताओं का तमन्ना तो तब पूरी होगी, जब मेनका यहां से चुनाव लडऩे से इंकार करें। स्थानीय नेता इस बात की दुआ भी कर रहे हैं। 

बता दें कि कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने अपनी नई पार्टी का गठन किया हुआ है। ऐसे में यह सीट खाली है। इस सीट पर चुनाव लडऩे के लिए भाजपा के कई चेहरों का नाम चला है। इनमें राज्यमंत्री नायब सैनी, लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी, जिला परिषद के चेयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी और जिला निगरानी कमेटी के चेयरमैन धर्मबीर डागर का नाम शामिल है। राज्यमंत्री नायब सैनी मुख्यमंत्री मनोहर लाल के खासे नजदीकी हैं। ऐसे में यह संभावना बनी कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल उनके नाम को आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र के लिए वे बाहरी हैं। कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में स्थानीय चेहरे को चुनाव लड़ाने की मांग भी उठ रही है। लाडवा विधायक डॉ. पवन सैनी भी कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं। कई सालों से वे चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं।

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डॉ. पवन सैनी स्थानीय है और सैनी समाज में उनकी पकड़ भी अच्छी है। काफी समय से जाट और सैनी समाज के बीच तालमेल सही नहीं बैठ रहा है, लेकिन डॉ. पवन सैनी ऐसे विधायक हैं, जिनका जाटों के बीच तालमेल काफी बढिय़ा है। उनकी जाट समुदाय में अच्छी खासी पैठ भी है। जिला निगरानी कमेटी के चेयरमैन धर्मबीर डागर भी टिकट की दौड़ में है। डागर जाट समुदाय से आते हैं। कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में जाटों की वोट साढ़े तीन लाख के करीब हैं।

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संसदीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट जाट समुदाय की है। ऐसे में यदि पार्टी ने जाट समुदाय को टिकट देने का मन बनाया तो डागर इसमें बाजी मार सकते हैं। वे लंबे समय से पार्टी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। डागर कुरुक्षेत्र लोकसभा निगरानी कमेटी के संयोजक के तौर पर पिछले पांच साल से संसदीय क्षेत्र के हर हलके में लोगों के बीच जाकर उनकी शिकायतें सुनने का काम करते आए हैं। जाट नेता के तौर पर उनकी हलके में गिनती होती है। ऐसे में अगर उन्हें पार्टी टिकट सौंपती है तो उन्हें जाट वोटरों का ज्यादा लाभ मिल सकता है। जिला परिषद के चेयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी भी टिकट की दौड़ में हैं। पार्टी हाईकमान में उनकी अच्छी खासी पकड़ है। जिप के चेयरमैन के नाते उनका कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र के हर हलके में अच्छा प्रभाव है। इन नेताओं की इच्छा तब पूरी होगी, जब मेनका गांधी यहां से चुनाव न लडऩे की हां ना भरें। 

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