संजीवनी टुडे

लोकसभा चुनाव: उत्तर मालदा सीट पर परिवार की राजनीतिक जंग का लाभ लेगी भाजपा

संजीवनी टुडे 23-03-2019 11:49:04


कोलकाता। लोकसभा चुनाव में पूरे देश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में मुकाबले बेहद दिलचस्प होने वाले हैं। एक तरफ सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस को अपना गढ़ बचाने की चुनौती है तो दूसरी ओर भाजपा बंगाल फतह के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती है। इसमें से भी कांग्रेस का गढ़ है मालदा उत्तर और यहां से मौजूदा सांसद मौसम बेनजीर नूर में एक सप्ताह पहले ही कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। तृणमूल ने उन्हें यहां से अपना उम्मीदवार भी बना दिया है। उधर कांग्रेस ने भी इस सीट से मौसम बेनजीर नूर के चचेरे भाई ईशा खान चौधरी को उम्मीदवार बनाया है और भाजपा ने माकपा छोड़कर पार्टी में शामिल हुए विधायक खगेन मुर्मू को यहां से सांसद का उम्मीदवार बनाया है। चूंकि परिवार के बीच लड़ाई है और यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है, इसलिए तृणमूल और कांग्रेस के बीच जमकर वोट बंटने की संभावना है। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि यहां से तृणमूल और कांग्रेस की लड़ाई का लाभ उसे मिलेगा।

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उत्तर बंगाल के मालदा ज़िले में राजनीति अभी भी दिवंगत पूर्व रेलमंत्री एबीए गनी खान चौधरी के नाम के इर्द-गिर्द ही घुमती है। गनी खान चौधरी के निधन के करीब दशक भर बाद भी इस क्षेत्र में उन्हीं के परिवार का कब्जा है। गनी खान चौधरी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकार में रेलमंत्री हुआ करते थे। मालदा रेलवे स्टेशन स्थापित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी, इसलिए मालदा वासियों के दिल में उनके लिए विशेष स्थान हमेशा रहा है।

गनी खान चौधरी के परिवार का है कब्जा
मालदा जिले में दो लोकसभा सीट हैं। एक मालदा उत्तर और दूसरा मालदा दक्षिण। मालदा उत्तर सीट से मौसम बेनजीर नूर सांसद हैं जो गनी खान चौधरी की भगिनी है, जबकि मालदा दक्षिण सीट से अबू हासेम (एएच) खान चौधरी सांसद हैं जो गनी खान चौधरी के भाई हैं। एबीए गनी खान चौधरी के दो भाई हैं- एएन खान चौधरी और एएच खान चौधरी। बहन थीं रूबी नूर जो विधायक भी थीं। मौसम, रूबी नूर की बेटी हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मौसम नूर के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद एएच खान चौधरी के बेटे ईशा खान चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। अर्थात एक ओर मालदा उत्तर सीट पर मुकाबला ममेरे भाई-बहन के बीच है तो दूसरी तरफ चुनावी जंग में गनी खान चौधरी का कुनबा जो आज तक उनका नाम भुनाता था, बिखरता दिख रहा है।

एएन खान चौधरी 2015 में ही तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन भतीजे ईशा खान चौधरी ने हराया था। ईशा खान चौधरी फिलहाल मालदा जिले की सुजापुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। वहीं उनके पिता एएच खान चौधरी मालदा दक्षिण लोकसभा सीट से वर्तमान सांसद है और 2019 के लिए इसी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार भी।

भाजपा को मिल सकती है बढ़त
कांग्रेस और तृणमूल के अलावा इस बार माकपा और भाजपा के प्रत्याशी भी मैदान में हैं। माकपा उम्मीदवार विश्वनाथ घोष भी मैदान में हैं। भाजपा के उम्मीदवार खगेन मुर्मू भी अपनी पार्टी को मजबूत करने में लगे हैं। कभी माकपा विधायक मुर्मू इसी माह भाजपा में शामिल हुए हैं।

 खगेन मुर्मू पिछली बार यहां से माकपा के उम्मीदवार थे और दूसरे नंबर पर आए थे। कभी यहां न के बराबर समझी जा रही भाजपा में पार्टी नेतृत्व ने नए तरीके से जान फूंकने की कोशिश की है। पिछले कुछ सालों में भाजपा ने इस इलाके में अपने जनाधार के विस्तार पर काफी जोर दिया था। साल 2016 का विधान चुनाव हो या गत वर्ष हुए पंचायत चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन में काफी सुधार आया है।

 वैष्णव नगर विधानसभा सीट से भाजपा के स्वाधीन कुमार सरकार विजयी हुए थे। इस बार मालदा में कई महीने से भाजपा लगातार मेहनत कर रही है। शीर्ष नेतृत्व के कई नेता दौरा भी कर चुके हैं। इसके अलावा लंबे समय से कांग्रेस और तृणमूल के बीच राजनीतिक जंग होने की वजह से इलाके के लोग भी अब परिवर्तन का मूड बना चुके हैं, जिसका लाभ लेने में भाजपा जुटी हुई है। ऐसे में इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है और माना जा रहा है कि पारिवारिक लड़ाई का फायदा भाजपा को मिल सकता है।

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क्या है 2014 का आंकड़ा 
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां से काफी दिलचस्प मुकाबला हुआ था। कांग्रेस के टिकट पर मौसम बेनजीर नूर में जीत दर्ज की थी। उन्हें 388609 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 33.41 फीसदी था। दूसरे नंबर पर माकपा प्रत्याशी खगेन मुर्मू थे। उन्हें 322904 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 27.77 फीसदी था। इस बार वह भाजपा के उम्मीदवार हैं। तीसरे नंबर पर तृणमूल कांग्रेस के सौमित्र रॉय रहे थे। उन्हें 197313 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 16.97 फीसदी था।

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