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लॉकडाऊन: चौका-चूल्हा में जब बंटाया हाथ, घर में आयी खुशहाली, घर में बढ़ा सम्मान

संजीवनी टुडे 07-04-2020 12:24:49

पति-पत्नी एक गाड़ी के दो पहिये होते हैं इस नीतिवचन का जब घर में अनुशरण कर पालन किया जाता है तो घर की रोजमर्रा की तू-तू और मैं-मै की किचकिच गायब हो जाती है


फतेहपुर। पति-पत्नी एक गाड़ी के दो पहिये होते हैं इस नीतिवचन का जब घर में अनुशरण कर पालन किया जाता है तो घर की रोजमर्रा की तू-तू और मैं-मै की किचकिच गायब हो जाती है, घर में खुशहाली का माहौल बनता है, आपसी रिश्ते मधुर होते हैं, घर स्वर्ग बन जाता है। बस पत्नी को नौकर नहीं दोस्त समझिये और दोस्त के साथ घर के काम में हाथ बंटाईये। फिर देखिये घर में आपका सम्मान दिन दूना रात चौगुना बढ़ता ही जायेगा।

 कहते हैं हर चीज में अच्छाई-बुराई दोनों होती है बस आपको चाहिए क्या? कोरोना जहां महामारी की आपदा लेकर आया है। वहीं कोरोना के कारण लागू लॉकडाऊन फुर्सत के समय घर में कार्य करने का सुअवसर भी प्रदान कर रहा है। जिससे आप अपनी पत्नी का दिल जीत सकते हैं। बस आपको राहुल की तरह घर के काम में हाथ बंटाना है।

कोरोना महामारी के चलते देश में लॉकडाऊन लागू कर सभी से घर में रहने की अपील की जा रही है। और संक्रमण को हर हाल में रोकने के लिए सरकार व प्रशासन की सख्त भी है। नौकरी, रोजगार, व्यापार, व्यवसाय, उद्योग धन्धे सब बंद हैं। ऐसे हालात में घर पर ही रहना एकमात्र विकल्प है। वैसे भी कोरोना के खिलाफ यह लड़ाई भी हम सब को मिलकर लड़ना भी तो है। इसलिए लॉकडाऊन का पालन करना हम सब का उत्तरदायित्व भी है।

इस उत्तरदायित्व को निभाते समय फुर्सत में यदि आप घर में भी अपना उत्तरदायित्व निभाने की पहल करते हैं तो आपका जीवन खुशहाल बन सकता हैं। स्वर्ग की खुशियां आपके घर के आंगन में भी आ सकती है।आईये राहुल की तरह घर के काम में हाथ बंटाकर इस सुअवसर से अपने परिवार में मिठास घोलने का काम करें। 

 फतेहपुर शहर के रानी कालोनी निवासी राहुल विश्वकर्मा अपनी पत्नी निशा और एक पुत्री काव्या के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया की लॉकडाऊन में घर में दिनभर समय काटना मुश्किल भरा काम रहता है। तो मैंने सोंचा क्यों न पत्नी के काम में हाथ बंटाया जाय तो किचन में पहुंचकर जब मैंने पत्नी से रोटी बनाना सीखने की गुजारिश किया तो उसने कहा आप और रोटी बनाना असंभव काम। हमने कहां आप सिखाओ तो सब कुछ संभव हो सकता है। लॉकडाऊन के दौरान आज मैं रोटी बेलना सीख चुका हूँ। और दोनों किचन में गप्प मारते हुए काम में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि पता ही नहीं चलता कब भोजन बन गया। पत्नी का व्यवहार भी बदल चुका है। उसके चेहरे पर खुशी रहती है। अब वह मुझे ज्यादा सम्मान देती है। जिससे अब पहले से अच्छा घर का माहौल बन चुका है। 

वहीं उसकी पत्नी निशा का कहना है कि पहले राहुल के पास मेरे लिए समय नहीं रहता था सुबह निकल गये शाम को आते थे थके-मादे से नजर आते और खाना खाकर सो जाते। कभी कोई हंसी-खुशी बात ही कहने व करने का मौका ही नहीं मिलता था। लेकिन लॉकडाऊन के चलते पूरे दिन घर में रहने के कारण राहुल का घर के काम में हाथ बंटाना और बात करने के लिए खूब समय देना अच्छा लगता है। घर में चारों तरह खुशहाली रहती है। काश यह लॉकडाऊन जैसा माहौल घर में हमेशा बन रहे।

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