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लॉकडाउन: एक माह बाद पैदल चलकर बार्डर पर पहुंचा श्रमिकों का जत्था

संजीवनी टुडे 25-05-2020 15:45:14

पिछले 25 अप्रैल को चेन्नई से पैदल चलकर आ रहे मज़दूरों का एक जत्था सोमवार को झारखंड-बिहार सीमा के बॉर्डर तक पहुंचा। इस जत्थे में कुल 20 लोग शामिल हैं, जो बिहार के तारापुर अपने गांव जाएंगे।


देवघर। पिछले 25 अप्रैल को चेन्नई से पैदल चलकर आ रहे मज़दूरों का एक जत्था सोमवार को झारखंड-बिहार सीमा के बॉर्डर तक पहुंचा। इस जत्थे में कुल 20 लोग शामिल हैं, जो बिहार के तारापुर अपने गांव जाएंगे।

सभी मजदूर अप्रैल माह में 25 तारीख को कुल 20 मज़दूरों का जत्था 25 मई को झारखंड-बिहार के सीमा पर पैदल पहुंचा। इसे अपने गांव तारापुर तक के लिए आगे की यात्रा भी ऐसे ही करनी है। आज जब दर्दमारा बार्डर पर मज़दूरों का यह जत्था पहुँचा तो सांसद निशिकांत दुबे के निर्देशानुसार सहायता कैम्प संचालित कर रहे बाबा बलियासे, जीतू पाठक ने उन्हें रोक कर खाना और पानी दिया। साथ ही मज़दूरों को आगे भेजने व्यवस्था की। गौरतलब है कि एक माह पूर्व पैदल ही चेन्नई से अपने घर वापस लौट रहे प्रवासी श्रमिकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए अत्यंत भावुक हो गये। इन मज़दूरों के दल में शामिल रोशन ने बताया कि इस एक माह के दौरान जब कहीं कुछ खाने को मिलता तभी थोड़ी राहत मिलती अन्यथा भूखे पेट ही दिन-रात सफर कर यहां तक पहुँचे हैं। इस दल में शामिल बाल्मीकि ने बताया कि रास्ते में कहीं-कहीं ट्रक वाले मिल जाते जो मानवीय आधार पर दस-बीस किलोमीटर ले जाकर फिर रास्ते में छोड़ देते। बावजूद उन्होंने अपनी यात्रा नहीं रोकी।

दर्दमारा बार्डर से तारापुर की दूरी 110 किलोमीटर है। बाबा बलियासे द्वारा उन्हें आगे भेजे जाने की व्यवस्था की जा रही है। जबकि जिला प्रशासन ने दावा किया है कि जिले में आने वाले सभी श्रमिकों को उनके गृह राज्य,जिला में भेजे जाने की पूर्ण व्यवस्था की जा रही है। लेकिन प्रशासन का यह दावा जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। नतीजतन माह भर से पैदल चला यह मज़दूर बार्डर पर पहुंचकर आगे का सफर पैदल चलकर अपने गाँव जाने का हौसला लिए चल पड़े हैं।

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