संजीवनी टुडे

आदिवासियों का साहूकारों से लिया कर्जा माफ होगा : कमलनाथ

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 09-08-2019 17:41:50

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आज कहा कि प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज माफ हो जाएंगे।


छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आज कहा कि प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज माफ हो जाएंगे। इससे करीब डेढ़ करोड़ आदिवासियों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज यहां अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बताया कि सरकार ने इसके लिए सभी औपचारिक व्यवस्थाएं कर ली है। सभी 89 अनुसूचित क्षेत्रों में यह कर्ज 15 अगस्त तक माफ होना शुरू हो जाएंगे। उन्होंने वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाये जाने की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आदिवासी वर्ग की मांग पर अनुसूचित जनजाति विभाग का नाम बदलकर आदिवासी विकास विभाग किया जायेगा। 

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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने साहूकारों से आदिवासियों द्वारा लिए कर्ज माफ करने के संबंध में कहा कि किसी आदिवासी ने कर्ज लेने के लिए अपनी जेवर, जमीन गिरवी रखी है तो वह भी उन्हें वापिस होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में कोई साहूकार अनुसूचित क्षेत्र में साहूकारी करेगा तो उसे लायसेंस लेकर नियमानुसार धंधा करना होगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर बगैर लायसेंस के किसी ने अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी का धंधा किया तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और इसे गैरकानूनी माना जायेगा। यह कर्ज आदिवासी नहीं चुकाएंगे। 

कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश के 89 अनुसूचित क्षेत्र विकासखंडों के आदिवासियों को साहूकारों से मुक्त कराने के लिए सरकार उन्हें रुपे डेबिट कार्ड देगी। इसके जरिए वे जरूरत पड़ने पर दस हजार रुपये तक ए.टी.एम से निकाल सकेंगे। उन्होंने बताया कि हर हाट बाजार में ए.टी.एम. खोले जायेंगे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के जिन भी आदिवासियों के वनाधिकार के प्रकरण खारिज हुए हैं उनका पुनरीक्षण किया जायेगा और पात्र होने पर उन्हें वनाधिकार पट्टा दिया जाएगा। नाथ ने कहा कि जहाँ भी वनाधिकार प्रकरण संबंधी आवेदन लं‍बित है उनका अभियान चलाकर निराकरण किया जायेगा।

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आदिवासी समाज में जन्म और मृत्यु के समय होने वाले रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए कमलनाथ ने मुख्यमंत्री मदद योजना भी शुरु की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवार में बच्चे के जन्म पर परिवार को 50 किलो चावल या गेहूँ दिया जाएगा। इसी तरह किसी आदिवासी परिवार में मृत्यु होने पर परिवार को एक क्विंटल चावल अथवा गेहूँ दिया जाएगा। खाना बनाने के लिए उन्हें बड़े बर्तन भी उपलब्ध करवाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 40 एकलव्य विद्यालय खोले जाएंगे। 40 हाई स्कूलों को उन्नयन कर उन्हें हायर सेकेण्डरी स्कूल बनाया जाएगा। आदिवासी क्षेत्रों में सात नए खेल परिसर बनेंगें। आदिवासी समाज के देवस्थलों को सुरक्षित रखने और उन्हें संरक्षण देने के लिए सरकार ने आष्ठान योजना शुरु की है।

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कमलनाथ ने कहा कि आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति सभ्यता और इतिहास को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने आदिवासी समाज के युवकों से आव्हान किया कि वे अपनी संस्कृति सभ्यता और इतिहास को जीवित रखने का संकल्प लें।

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