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7 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों में नहीं है व्याख्याता, योग्यता दसवीं तक की, सरकार 11 वी 12 वी को पढ़वा रही

संजीवनी टुडे 02-08-2020 16:51:31

लगभग 7 हजार स्कूलों में 11वीं,12वीं में पढ़ाने के लिए अंग्रेजी एवं हिन्दी अनिवार्य के व्याख्याता नहीं हैं।


लंबे समय से पद स्वीकृत नहीं कर रही सरकार,वरिष्ठ अध्यापक ही 11वीं,12वीं में पढ़ा रहे अनिवार्य विषय,

बीकानेर। शिक्षा विभाग में पिछले शिक्षा सत्र में 33 जिला मुख्यालयों और इस सत्र में 167 ब्लाॅक में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के शुरुआत की जा चुकी है। जिलों के 33 स्कूलों में कक्षा 1 से 9 व 167 ब्लाॅक स्तर पर कक्षा 1 से 8 में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होगी। अभिभावकों का इन स्कूलों में बच्चों को प्रवेश दिलवाने के प्रति रुझान है। दूसरी ओर राज्य में 2015 से चल रहे लगभग 7 हजार स्कूलों में 11वीं, 12वीं में पढ़ाने के लिए अंग्रेजी के व्याख्याता नहीं हैं। शिक्षक नेता मोहरसिंह सलावद ने बताया कि व्याख्याता के रिक्त पदों के चलते कारण इन स्कूलों में वरिष्ठ अध्यापक ही 11वीं एवं12वीं कक्षा में अनिवार्य हिंदी एवं अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं।

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राज्य के शिक्षा विभाग में अप्रैल 2015 से लागू स्टाफिंग पैटर्न में नव क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य हिंदी एवं अंग्रेजी को छोड़कर केवल तीन ऐच्छिक विषय व्याख्याता के पद ही दिए गए हैं। इस पैटर्न में ही प्रावधान रखा गया है कि तीन वर्ष बाद कक्षा 11 व 12 में 80 छात्र होने पर अंग्रेजी,हिन्दी अनिवार्य व्याख्याता के पद दिए जाएंगे। 2015 के बाद 7 हजार से अधिक सीनियर सैकंडरी स्कूल बने हैं। इनमें छात्र संख्या 80 से अधिक है। लेकिन अंग्रेजी,हिन्दी अनिवार्य  व्याख्याता के पद स्वीकृत नहीं हुए हैं। जिसका खामियाजा छात्रों को उठाना पड़ रहा है  जिस कारण छात्र लगातार विषयों में पिछड़ रहे है। 

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विषय विशेषज्ञ नहीं होने से कमजोर रहती है टॉपिक पर पकड़

विषय विशेषज्ञ नहीं होने के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की अंग्रेजी कमजोर रह जाती है। पहले ही दसवीं के बाद बहुत कम छात्र अंग्रेजी साहित्य लेते हैं। करीब दस हजार छात्रों ने इस साल इंग्लिश लिटरेचर की परीक्षा दी है। अंग्रेजी कमजोर होने के कारण 12वीं पास करने के बाद कई परीक्षाओं में उन्हें दिक्कत उठानी पड़ती है।

निजी स्कूल का ही रह जाता है विकल्प

दसवीं के बाद अच्छी अंग्रेजी पढ़ने के लिए छात्रों के पास प्राइवेट स्कूल का विकल्प ही रह जाता है। हालांकि वहां की फीस काफी अधिक होती है। अंग्रेजी विषय लेकर बोर्ड परीक्षा देने वाले अधिकांश छात्र निजी स्कूल के ही होते हैं। विषय विशेषज्ञ बताते हैं कि 12वीं कक्षा में लेक्चरर होना ही चाहिए। इससे छात्रों की अंग्रेजी में सुधार होगा और उन्हें अवसर भी मिलेंगे।

इनका कहना है
स्टाफिंग पैटर्न सीएम,प्रशासनिक सुधार विभाग व वित्त विभाग से अनुमोदित है। नियम 6-2 के तहत अंग्रेजी व हिंदी अनिवार्य के व्याख्याता के पद स्वीकृत होने चाहिए, संघ की ओर अनिवार्य विषयों के पद स्वीकृत करने की मांग को लंबे समय से पूरा करवाने का प्रयास किया जा रहा, इस मांग को लेकर शिक्षा निदेशालय पर 13 दिन धरना भी दिया लेकिन आश्वाशन मिला काम नहीं हुआ अगर अब जल्द पद स्वीकृत नहीं किए गए तो छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए आंदोलन किया जाएगा।
 

मोहरसिंह सलावद,          
प्रदेशाध्यक्ष राजस्थान एलीमेंट्री एण्ड सैकेण्डरी टीचर्स एसोसिएशन (RESTA)

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