संजीवनी टुडे

रुंगटा ग्रुप के प्लांट में नहीं निकली मल्हार जाति के लोगों की जमीन

संजीवनी टुडे 24-02-2020 16:21:09

रुंगटा ग्रुप के द्वारा जमीन हड़पने का मामला काफी चर्चित रहा है, लेकिन जब हकीकत सामने आई तो यह स्पष्ट हो गया कि मल्हार जाति के लोग प्लांट प्रबंधन से वसूली करने के लिए उन पर दबाव बना रहे थे।


रामगढ़। जिले में रुंगटा ग्रुप के द्वारा जमीन हड़पने का मामला काफी चर्चित रहा है, लेकिन जब हकीकत सामने आई तो यह स्पष्ट हो गया कि मल्हार जाति के लोग प्लांट प्रबंधन से वसूली करने के लिए उन पर दबाव बना रहे थे। उनके नाम पर एक धुर जमीन जमाबंदी नहीं है। पतरातू सीओ और भूमि सुधार उप समाहर्ता की रिपोर्ट जब अनुमंडल कार्यालय में पहुंची तो एसडीओ ने उसे अपने जजमेंट में भी शामिल किया।

एसडीओ के द्वारा वर्ष 2008 और 2017 में दो जजमेंट दिया गया है। इस जजमेंट में भूमि सुधार उप समाहर्ता के रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है। जिसमें कहा गया है कि हेहल में जमीनों की जमाबंदी जगतपाल सिंह, लट्टू सिंह, गुणी सिंह, प्रयाग सिंह, मंजूर अली, प्रयाग सिंह, लुदी मियां, बंधन सिंह, अजीमुद्दीन मियां, झरि सिंह, खेदन सिंह और जानकी सिंह के नाम पर कायम रही है। कुछ लोगों को जमीन पर जमाबंदी वर्ष 1957 के पहले से कायम है। कुछ लोगों की जमाबंदी 1964 से खरीदेगी के बाद शुरू हुई है। इन सभी के नाम पर रसीद भी कट रही थी। कभी भी ना तो मल्हार जाति के लोगों के नाम पर यहां जमाबंदी रही है, और ना ही बिरहोर जाति के लोग ही यहां कभी जमीन पर कायम रहे हैं।

अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में वर्ष 2013 में धारा 133 के तहत एक वाद 03/13 दर्ज किया गया था। इस मामले की कार्रवाई जब शुरू हुई तो राजकिशोर मल्हार एवं मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक ने अपना अपना पक्ष रखा। राजकिशोर मल्हार ने उस वाद में स्पष्ट तौर पर लिखा था कि हेहल के खाता नंबर 86 और प्लॉट नंबर 563 की भूमि पर विगत 50 -60 वर्षों से वे लोग आवास बनाकर निवास करते हैं।

उन्होंने दावा किया था कि उनके आवासीय परिसर के बगल में रुंगटा ग्रुप का प्लांट है। प्लांट से होने वाले प्रदूषण की वजह से उनके जनजीवन एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। राजकिशोर मल्हार ने कहा था कि वर्ष 2009 में तत्कालीन डीसी ने रुंगटा ग्रुप को यह आदेश दिया था कि वह मल्हार और बिरहोर जाति के लोगों को निर्वासित कर उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। लेकिन प्रबंधन के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि इस वाद में राजकिशोर मल्हार ने फैक्ट्री परिसर में निवास करने को लेकर भूमि का कोई प्रमाण पत्र पेश नहीं किया था। इस वजह से उन्हें इस केस में हारना पड़ा था। प्लांट के मालिक रामचंद्र रूंगटा ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह रामगढ़ जिला प्रशासन के निर्देशों का सम्मान करते हैं। 

उन्होंने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन हमेशा मल्हार और बिरहोर जाति के लोगों को पुनर्वासित करने के लिए तैयार है। इसके लिए उन्होंने योजना भी बना रखी थी, लेकिन मल्हार जाति के लोग बहकावे में आकर और फर्जी जमीन के दस्तावेज के आधार पर अक्सर उन्हें परेशान करते रहते हैं। आज भी अगर जिला प्रशासन उन 33 परिवारों को 5 डिसमिल जमीन मुहैया कराए, तो फैक्ट्री प्रबंधन उस पर मल्हार और बिरहोर जाति के लोगों के लिए हर सुविधा उपलब्ध करा देगी।

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